हम तड़पा करते हैं

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** तुमसे मिलने की खातिर, ईश्वर से प्रार्थना करते हैं,जब सामने तुम आते हो, तुमसे ही हम पर्दा करते हैं। जब भी दूर जाते हो, मिलने को हम तड़पा करते हैं,तेरी नजरों में नहीं कीमत मेरी, बस हम रोया करते हैं। मेरे लिए बस तुम ही तुम हो, इसे निभाया करते हैं,ऐसा न … Read more

नारी का श्रृंगार ‘मर्यादा’

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मर्यादा जैसा नहीं, नारी का श्रृंगार।सबसे चोखी बात यह, है उत्तम उपहार॥ मर्यादा से नारियाँ, बन जाती हैं खास।मानो सब यह मान्यता, करो सभी विश्वास॥ शोभा बढ़ती नार की, मर्यादा यदि संग।आकर्षण हो चौगुना, बिखरें नित नव रंग॥ मर्यादा को धारकर, सीता बनीं महान।यह साँचा श्रृंगार है, जिसमें नारी-आन॥ मर्यादा से … Read more

फागुन का है जोर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रंगों ने अँगड़ाइयाँ, फागुन का है जोर।अपनापन रिश्ते मधुर, घुला मधुर रस भोर॥ फागुन का है जोर चहुँ, ढोलक बोले तान।गली-गली में गूँजती, जोगीरा की जान॥ फागुन का चहुँ जोर है, पिचकारी मुस्कान।धूप सुनहरी ओढ़कर, धरती रंग सुहान॥ फागुन का रस माधुरी, कोयल गाए राग।टेसू की लाली जगे, वन … Read more

खुशियों का सागर

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ वह ‘सोंधी’-सी महक,तुलसी के इस घर ‘आंगन’ मेंरोशनी की ‘ज्योति’ है बेटियाँ,वह ‘खुशियों’ का सागर है। हर घर की आन, बान और शान है वह,उनकी ‘मुस्कान’ हमारे घरों का सुख-चैन है‘ईश्वर’ ने भी उन्हें वहीं भेजा होता है,जिससे वह ‘खुश’ होता है, बेटियाँ ‘खुशियों’ का सागर है। बेटियाँ खुदा की … Read more

इतनी प्रीत क्यों अंगूर की बेटी से

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* तुम प्रीत इतनी क्यों करते हो,अंगूर की बेटी सेवह तो है एक मीठी छुरी,अपनी गिरफ्त में कस लेती। जो हर एक भोले-भाले को,पहले तो हँस-हँस केपिलाती जाम अपने नाम से,फिर बड़ी उमंगें, बड़ी तरंगें। उड़ती है सिर्फ नाम से,आकर्षण से हीखिंचे-बंधे आ जाते,कितने पास तेरे। हँसी-हँसी में पी कर,बन जाते हैं … Read more

मन में सौ-सौ द्वंद चले

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** माँ-बाप की छाँव तले,बड़े प्यार से हम थे पलेज्यों-ज्यों अपनी उम्र बढ़ी,दबते गए हम बोझ तले। बड़ी-बड़ी चाहत थी मन में,और दुनिया रंग-रंगीली थीहरदम खुशियाँ ही मन भाए,पर सुख-दु::ख बनी सहेली थी। ख्वाब सुनहरे थे देखे, और,हर चाहत से उम्मीद जुड़ीअरमानों के पंख लगे थे,ख्वाहिश रह न जाए अधूरी। पर चाहत पर … Read more

नहीं मानना हार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सुन लो बच्चों ध्यान सेनहीं मानना हार,बोर्ड परीक्षा देनी हैहो जाओ तैयार। जीवन तुम्हें बनाना सुंदरतनिक परिश्रम करना,ध्यान से पढ़ना पाठ तुमनहीं तुम्हें है डरना। रात को सोने से पहलेएक बार सब पढ़ लेना,प्रातः उठ कर फिर तुमउसे रिवाइज कर लेना। पेपर मिलते ही पहलेतुम ईश्वर को याद करो,पहले प्रश्न सभी पढ़ … Read more

एपस्टीन फाइल्स

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* बेगुनाह चीखें जब गूँज उठी,परतें-दर-परतें उधड़ गईनरभक्षियों की ‘एपस्टीन फाइल्स’,कालिख बन जग में पसर गई। ये वीभत्स तमाशा कहाँ हुआ ?शीशे-सा कानों में उतर गयाधरती सुन जैसे चटक गई,मन पीड़ा से शर्मसार हुआ। कई चेहरों से नक़ाब उड़े,काले मुखड़े एकसाथ दिखेजो लगते थे प्रेरक सबको,वो गंदी नाली के कीट लगे। भोगों … Read more

उतर आया मधुमास

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* आ गया बसंत प्रिय सखी, खोलो मृदुल नयन,छलक रहे जाम सृष्टि में, जरा करो आचमनकोमल-सी हँसी तुम्हारी जैसे कोमल किरण,गालों पर बिखरी लाली, उजला-सा अंतर्मन। अधर पर ले मुस्कान, छुओ बसंतिया तन-मन,मुस्कान सुन तुम्हारी, पुलकित भी होगा गगनहोंठों पर ये प्रिय तुम्हारे, उतर आया मधुमास,गुलमोहर की लाली लेकर, बहुत बने है … Read more

नारी की पहचान रंगों में

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** रंगों की उन्मुक्त हवाएँजब आती हैं,फागुन का संदेश,फिर वो लाती हैंआँगन-आँगन जब गूँज उठते हैं,उमंग, स्नेह और हँसी के फव्वारे विशेष। पर होली इस बार कुछ कहती,नारी की पहचान रंगों में भी हो जातीवह गालों पर गुलाल से ज्यादा,अपने सपनों को रंगतीकोमल मुस्कान को दृढ़ बनाती,मीरा-सा अटूट विश्वास है‌ रखतीदुर्हर मन में … Read more