उत्सव… उमंग

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* जीने की उमंग जगाते हैं,व्यस्तता से खुशी चुराते हैंउत्सव जब गृह में आते हैं,सुंदर वर्तमान बनाते हैं। वह उत्सव ही तो होते हैं,अपनों की पहचान कराते हैंपरिवार का महत्व बताते हैं,ज़िंदगी को संपूर्ण बनाते हैं। यात्राएं कराते हैं, मस्ती में रमाते हैं,सुस्त-सी ज़िंदगी, ज़िंदादिल बनाते हैंभूले पकवानों का स्वाद दिलाते हैं,संस्कार, … Read more

स्त्रियाँ और चट्टानें

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ स्त्रियाँ…टूटती नहीं हैं, तोड़ दी जाती हैं,गुजरते वक़्त की मार से जैसे-मार्ग में पड़ी कोई चट्टान,लगातार सहते आघातों सेरेत हो जाती है, वैसे ही…बहुत धीरे से, मौन के बीच, विश्वास तले,मिट्टी के घड़े-सी चूर हो जाती हैं। स्त्रियाँ…काँच की तरह, बिखरती नहीं है,बस… खुद को समेटना छोड़ देती हैंजैसे कोई … Read more

साधन भक्ति को बना

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** दिन में नभ में सारे तारे नहीं दिखते,ऐसा नहीं है कि तारे नहीं होतेअज्ञान की दशा में ईश्वर नहीं दिखते,ऐसा नहीं है कि ईश्वर नहीं होते। दुर्लभ मनुज-देह प्रभु-मिलन जतन नहीं,जन्म तेरा व्यर्थ अरे! बहुत बड़ा सच है ये।तेरी भावना जैसी प्रभु से वो पाता है,प्रभु भये कल्पतरु बहुत … Read more

नये साल में

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सभी अधूरे सपने मेरे, पूरे होंगे नये साल में,अरमानों में रंग भरेंगे, नहीं फंसेंगे मकड़ जाल में। अब तक जो भी रहे अधूरे, सपने वे मुस्काएंगे,हमको देकर के खुशियाँ वे, मंज़िल आज सजाएंगे। नहीं निराशा संग रहेगी, मातम को दफनाएंगे,कर्म करेंगे नये साल में, मंगल गीत सुनायेंगे। जाने वाले का वंदन … Read more

श्री राम नाम की ज्योति जले

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* श्रीराम नाम की ज्योति जले, मन-मंदिर उजियारा हो,करुणा की गंगा बह निकले, हर द्वारे प्रेम धारा हो। रघुनंदन की मधुर छवि में, बस जाए जीवन-राग,सत्य, शील, मर्यादा से, मिट जाए मन का दाग। वन-पथ भी पावन बन जाए, जब चरण पड़े सुकुमार,त्याग तपस्या की मूरत हो, राम हमारे आधार। … Read more

जज़्बातों की राख से…

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** मन की खामोशी में इक तूफ़ान पलता है,शब्दों की झिलमिल में भावों का जंगल जलता हैविवेक का दीपक बुझता है जब,अंतर का अंधकार स्वयं को निगलता है। स्मृतियों की परतों में एक चेहरा अनलिखा,मौन की चादर में लिपटा, समय से भी पुरानावो क्षण-जिसने हृदय की नसों में राग भरा,अब केवल प्रतिध्वनि है-सूनी, … Read more

सबकी सुनते श्री बालाजी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** संवर जाता है,श्री बालाजी का मंदिरपुष्प की माला अर्पण से,पूजन सेभजन से,कथा श्रवण सेजब भक्ति भाव रमा हो मन में। नारियल, दीपक और अर्जीलगते जैसे वाहक हों श्री बालाजी केमन महकता,निखरता जाएजब लगी हो लगन श्री बालाजी से। अर्जी सुनी जाती,श्री बागेश्वर धाम मेंसमस्याओं को श्री बालाजी केचरणों में रख कर,विश्वास … Read more

अमिट पहचान बनाएँ

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* चलो चलें पहचान बनाएँ,अपने लिए जीते हैं सभीदूसरों के हितों को सोंच,मानवता के वृक्ष लगाएँ। संसार में आते हैं असंख्य लोग,संसार से जाते हैं असंख्य लोगअपने लिए ही तो जीते हैं सभी,बिरले बनाते पहचान कभी-कभी। त्यागें संसार से जाने का डर,त्यागें स्वार्थ में जीने का घरमानव को मानव से जोड़ … Read more

पाई-पाई जोड़कर…

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* पाई-पाई जोड़कर जीवन की गाड़ी चलती,माता-पिता की मुट्ठी में देखो घर की दुनिया पलतीबचपन की मासूम ख्वाहिशें सपना बन मुस्कातीं,कभी किताबें, कभी खिलौने,कभी नए कपड़ों को नजरें ललचाती। पाई-पाई जोड़कर सपनों की बुनियाद रखी,अरमानों को ताक पर रख, घर की गाथा लिखीबच्चों को भरपेट खिलाकर माँ-बाप ने निवाला खाया,अपनी मेहनत के पसीने … Read more

सबका ही अच्छा करो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सबका ही अच्छा करो, बुरा न सोचो अन्य।बढ़ो सदा पुरुषार्थ पथ, परमारथ गुण क्षम्य॥ लोभ क्षोभ मद कोप फँस, करे बुरा अविराम।नींद कलह हिंसा व्यसन, निरत दुखी बदनाम॥ करो नहींं विश्वास तुम, कही बात मुख अन्य।सुनी बात की जाँच हो, वरना पाप जघन्य॥ गन्दी बातें जो सुनी, फँसो नहीं … Read more