एक-दूजे के लिए ही जीना

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** मुस्कानों के फूल खिला करनगरी एक बसाई तुमने,घर-आँगन में बजी बधाईलिख ली एक कहानी तुमने। बनी नायिका महि पग रखतीनेह-सुधा रस गान किया,बजती पायल की रुनझुन नेजीवन को सुर-ताल दिया। प्रेम का बिरवा हृदय लगायाअतुल प्रेम-धन खूब लुटाया,सच मानों तो साझा जीवनप्रेम विहीन न किसी को भाया। सदा समर्पण प्रेम में करना,एक-दूजे … Read more

खो गया सितारा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* खो गया सितारा, अभिनय का खो गई महक बस यादों में,खो गया तरन्नुम मजलिस का खोया चरित्र अफ़सानों में। जो गाँव की माटी में लिपटा जो अरमान बीच बहती धारा,था कालजयी अभिनेता वह ‘ही- मैन’ धरम मस्तानों में। खो गया सहज अति सौम्य प्रकृति,व्यक्तित्व अनोखा दुनिया में,दमदार सफलता अदा … Read more

‘गजब’ थे ‘धर्मवीर’

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* धर्मेन्द्र देओल को श्रद्धासुमन… धरमेन्दर ‘शोले’ धरे, ‘गजब’ थे ‘धर्मवीर’,‘जीवन-मृत्यु’ से परे, बसे दिल के कुटीर। ‘राकी रानी की प्रेमकहानी’,मैं तुम्हें सुनाऊँ ‘राजा जानी’। सच नाम ‘दोस्त’ का ‘सत्यकाम’ था,‘चाचा भतीजा’ दो का दाम था। ‘बंटवारा’, ‘शालीमार’ का लिया,‘दिल्लगी’ इक बार उसने भी किया। ‘लोहे’-सी देह ‘जागीर’ रखता,‘गुड्डी’ नहीं ‘अनुपमा’ को तकता। … Read more

बांध सब्र का

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** जब भी सब्र का बाँध टूट जाएगा,हर मुसाफिर राह में छूट जाएगा आशा व विश्वाश की डोर टूट जायेगी,मुसीबतों की सिसकियाँ भी उभर जाएगी। सब्र का बांध कब तक रह पाएगा,अवसाद में जीवन कब तक जीया जाएगा। जब-जब अपने पराए बन जाएंगे,तब-तब सब्र के बांध टूट जाएंगे। मन के क्रंदन समक्ष सबके … Read more

शब्दों से रची है ज़िंदगी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* शब्दों से रची है ज़िंदगी, सोच समझ कर खुद पर ढालो।सुखद शान्ति सद्भाव परस्पर, मुख मीठी मुस्कान सम्भालो॥ फँसों नहीँ तुम शब्द जाल में, शब्द बाण दुख स्वयं बचा लो।शब्दों से यह रची ज़िंदगी, विनय शील सद्कर्म निभा लो॥ पौरुष यश महके सदा यतन, वतन प्रगति मुस्कान सजा लो।खिले … Read more

प्रकृति की चेतावनियों को गंभीरता से लें

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** जलवायु परिवर्तन से उपजी पर्यावरणीय चुनौतियाँ आज मानव सभ्यता के अस्तित्व तक को प्रभावित कर रही हैं। जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर का वैज्ञानिक विचार नहीं, बल्कि तत्काल अनुभव किया जाने वाला यथार्थ है, जिसकी भयावहता का प्रमाण सीएसई और डाउन टू अर्थ की क्लाइमेट इंडिया २०२५ की रिपोर्ट में स्पष्ट दिखाई … Read more

रजनी और सितारे

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* टिम-टिम दीप जले हैं गगन में संध्या हुई विदा,अस्ताँचल के वर्ख सिंदूरी अभी- अभी हुए जुदानयनों से ओझल हो गई पहाड़ों की श्रृंखला सदा,पंछियों के झुण्ड और कतारें हो रही है जुदा-जुदा। तारों की झिलमिल रोशनी छूने लगी जमीं क़ो है,कल-कल किरणों की चासनी पीने लगी नमी को हैफ़ैल रहा तमस … Read more

शुभ दिन आया

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** जन्मदिवस का शुभ दिन आयाखिली रात की रानी है,मंद-सुगंध पवन है बहतीआयी शरद सुहानी है। खट्टी-मीठी प्यारी यादेंउर में वीणा के तार बजे,जीवन की इस भाग-दौड़ मेंअनुपम-सा उपहार सजे। लिखी कहानी चार दशक कीदशक आधा और बिता आए,बढ़ते जाते कदम जो आगेअनुभव बहुत जुटा पाए। बीते वर्ष सुहाने क्षण वोहृदय पटल पर … Read more

कौन बनेगा करोड़पति ?

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** करोड़पति के सेट पर, हो गया आज बवाल,कंप्यूटर स्क्रीन पर, आया गज़ब सवाल। आया गज़ब सवाल जीतकर, फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट,हॉट सीट पर आ गए, नेता जी एक भ्रष्ट। पहला प्रश्न जिताएगा, रुपये पाँच हजार,देश में भ्रस्टाचार का, कौन है जिम्मेदार ? सही जवाब बतलाइए, ऑप्शन ये रहे चार,ए) जनता, बी) मंत्री, … Read more

ज़िंदगी फिर कहाँ मिलती ?

वंदना जैनमुम्बई(महाराष्ट्र)************************************ धूप को बना हमसफर,परछाइयाँ चलती रहती हैं चाँद को टांग कर टहनी पर,हवाएं पंखी झलती हैं झरनों के शोर को भर आँचल में,नदियाँ खामोशी से निकलती है पंछियों के नीड़ में दुबक कर,एक नन्ही-सी ज़िंदगी पलती है। भौरों की गुन-गुन के स्वरों से,मचल कर एक कली खिलती है। भोर से सांझ के सफ़र … Read more