होली-ऐसा रंग नहीं है भाता
धर्मेंद्र शर्मा उपाध्यायसिरमौर (हिमाचल प्रदेश)******************************************** होली विशेष… होली के त्यौहार में,रंग-बिरंगे लगते वनदेख एक-दूसरे को,फैला रहे हैं वह सुगंध। फूल-फूल भंवरे गाते,देते प्यार का संदेशमगन रहते प्रेम में,रात-दिन गुजारते। मूर्ख मानव भूल गया,प्रेम का त्यौहार है आयातन को बना रहा रंगीन,मन का मेल न धोया। हो कोई ऐसा रंग बना जो,मन की दूरी को दूर … Read more