पेड़ बनो
दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* बन सको तो पेड़ बनो,सीखो इनसे देनापरहित में जिसने सदा,सीखा सब कुछ अपना देना। अपनी शाखों में पंछियों को,देते स्नेह बसेराइनकी शीतल छाँव तले,कितनों ने डाला डेरा। जब तक रहता अस्तित्व इनका,प्राण-वायु ये देतेतपती धूप में राहगीरों को,शीतल छाया देते। क्षमा भावना इनसे सीखो,पत्थर खाकर भी फल देतेमीठे फल से भूख मिटाते,शीतल … Read more