नवदुर्गा तुम आ गईं हरने को पाप
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* नवदुर्गा तुम आ गईं, हरने को हर पाप।संभव सब कुछ आपको, तेरा अतुलित ताप।। सद्चिंतन तजकर हुआ, मानव गरिमाहीन।जगजननी माँ दुख हरो, सचमुच मानव दीन।। ममता है तुझमें भरी, तू सचमुच अभिराम।माता जी तेरे सदा, हैं नित नव आयाम।। तू करुणा करती सदा, तेरा पावन नाम।यह जग तेरा है सदा, दुर्गा … Read more