खिड़की पर ठहरी धूप
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* नित ही, खिड़की पर ठहरी धूप बात करती है,खिड़की पर ठहरी धूप से सौगात झरती है। खिड़की पर ठहरी धूप मुहब्बत को समेटे है,खिड़की पर ठहरी धूप भावनाओं को लपेटे हैखिड़की पर ठहरी धूप हर पीर को हरती है,खिड़की पर ठहरी धूप से सौगात झरती है…। खिड़की पर ठहरी धूप अहसासों … Read more