कोई दूत
संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** जब कोई नहीं रहता,तब कोई तो होता अपनाबाँटो जब खुशियाँ,खुशियाँ हो जाती दुगनीतब सोचते यदि होते तो,खुशियाँ छू जातीचाँद-तारों को,लेकिन नहीं है मेरे अबमेरे हैं वो महज रिश्ते हैं,फर्ज निभाकर करतेरिक्त स्थान की पूर्ति,ख्याल आतापूछने वाला कोई तो है,जो खुशियों में होताशामिलला देता आँखों मेंपुराने सपने,जो संजोए थे कभीउनकी कमी पूरी … Read more