बूँद-सा बन जा
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** टप-टप टपके राह बनातीबूँद न हारी चलती जाती,धीरे-धीरे वह बलखातीकठिन डगर पर वह मुस्काती। बूँद-बूँद से घट भर जाताबूँद*बूँद भर सिंधु कहाता,लघु को तुम सब लघु मत जानोलघुता ही बढ़ बड़ा हो जाता। नर तू भी बूँद-सा बन जा,नित प्रति कर्म-धर्म तू कर जा।एक दिवस जग जय-जय गाए,तेरा यश नभ तक फैलाए॥