माया में फँसता अज्ञानी

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६…. माया में फॅंसता, ईश्वर भी हँसता कैसा मानव, अज्ञानी।जीवन भर रोता, कभी न सोता,करता है वह, नादानी।प्रभु से विरत रहे, पापरत रहे,करता रहता, मनमानी।माया है ठगिनी, जीवनहरिणी,कर देती ये, हैरानी॥ माया का बंधन, दिखता चंदन,अंत बड़ा ही, दुःख भरा।मन को भटकाता, रूप दिखाता,लगता है सब, हरा-हरा।नश्वर है … Read more

पढ़ाई ही सब कुछ

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ मन था विश्वास, मन का है सम्मान,मान मिले या मिले अपमानपढ़ना है और बस पढ़ना है,पढ़ कर ही सब मिल सकता है। संघर्ष है जीवन सेअपमान का घूंट पीना हैजात-पात को खत्म करना है,मिले सबको सम्मान। पूजा का मंदिर हो या हो अस्पताल ,या हो कोई समारोह सब जगहऊँच-नीच का भेद रहे … Read more

बनो फूल से…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** प्यारा गुलाब,बोले बहुत कुछसबको भाता। साथ में काँटा,बचना है जरूरीज़िंदगी में यूँ। अच्छे में बुरे,ये सिखाए ज़िंदगीजैसे गुलाब। सदा लुभाए,मन को भाए फूलरंग निराले। ‘फूलों का राजा’,कहलाता गुलाबलाल-सफेद। लाल गुलाब,मिले जीवनसाथीप्रेम प्रतीक। है ज़िंदगी भी,देखो रंग अनोखेकईं हिसाब। कभी खजाना,कभी हर सू गमकभी गुलाब। पीला गुलाब,निभा लो बस दोस्तीसीधा हिसाब। बनो … Read more

वसन्त खिले मुकुलित रसाल

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* वसन्त खिले मुकुलित रसाल, गूंजे तान भ्रमर मधुराई छाए,नव प्रणय युगल रोमांच मिलन, खिले मकरन्द महके गाए। अठखेल करे तितली पतंग, वासन्तिक पिकगान सुहाए,ऋतुफलकन्द सुरभि वन-कानन, सतरंगों समरसता लाए। मुकुल हँसे तो नवभोर सजे, धरती नूतन रूप सँवारे,नव पल्लव की संकोच लिए, कुसुमित कलियाँ रंग उधारे। मौन छुपाए प्रिय … Read more

सबका प्यारा गुलाब

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** सुन्दर गुलाब सबका प्यारा होता है,पर साथ में काँटा भी लगा होता है। जिस किसी को होगा गुलाब से प्यार,वह काँटों से भी जरूर करेगा प्यार। कई रंगों का होता है ये प्यारा गुलाब,फूलों का राजा कहलाता है ये गुलाब। हरा, लाल, पीला, काला, सफेद, नारंगी,सभी को भाएं ये फूल आसमानी, बैंगनी। … Read more

बसंतिया भ्रमर

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* वन उपवन खिले-खिले से, मुकुल नवथर प्रचुर है,खिल रहा बागान, कानन में कली कली का अधर हैचमन-चमन हर सुमन-सुमन की आयी नई बहार है,बसंत ऋतुराज वसुधा को अब, लुटाने लगा उपहार है। हर तरफ गुनगुना रहे कुसुमों पर भ्रमर दल बल,परागों से जैसे फूट पड़ी है स्वर-स्वरों की हलचलभंवरा-भंवरा कली सुमन … Read more

ज़िंदगी इम्तिहान लेती है…

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* फूलों के साथ काँटों का हमें भान देती है,ज़िंदगी कभी गम तो कभी खुशी का दान देती है। ज़िंदगी हमेशा हमारा इम्तिहान लेती है,कभी हमें अपनेपन का भान देती है। आते हैं कभी खूबसूरत पल ज़िंदगी में,ज़िंदगी हमें भी सदा सच्चा मान देती है। फासले बढ़ते रहे दिल से … Read more

यह चेहरे…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ रिश्तों के रंग ‘बदलते’ यह चेहरे,ज़िंदगी में क्यों साथ छोड़ देते हैं ?उम्मीदों का यह दामन ना जाने क्यों खत्म हो रहा,लगता है उनके चेहरे पर नकाब लगा है। क्यों डुबा हुआ हूँ मैं तेरे प्यार में!हर वक़्त तुझे ही तलाशता रहता हूँपर तूने साथ छोड़ दिया है मझधार में…रिश्तों … Read more

अनिश्चित विश्व का विलाप

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** अंधियारे में डूबा दिख रहा है सम्पूर्ण संसार,भविष्य में दिख रहा हर ओर बस अंधकारकहीं है महामारी तो कहीं है युद्ध की आग,सुख-शांति की चाह में, हर ओर दौड़-भाग। जलवायु बदल रही, धरती है देखो रोती,नदी-तालाब सूख रहे, धरा हरियाली खोतीतकनीक बढ़ रही लेकिन प्रकृति पीछे छूट रही,लोभ की दौड़ में … Read more

कर्तव्य करते जाना

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कर्तव्य करते जाना है, दिल में सुकून लाना है,कर्तव्य अपना पूर्ण करूँ, ऐसा मन में ठाना है। कर्तव्य कार्य मिलता है, सिर्फ मानवों को ही,भाग्य मिले पशुओं को, क्या किसी ने जाना है ? कर्तव्य सभी अपना, ईमानदारी से करें परिपूर्ण,ईश्वर से डरें सब, क्यों किसी को नर्क में जाना है ? … Read more