कहाँ खो गया पनघट

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सूखते कुएं की कहानी है ये,वीरान पनघट की कहानी है येकभी आबाद थे जो,उन सूने घाट की कहानी है ये। एक समय पनघट पर जब,पनिहारिन का लगता मेला थाखनकती चूड़ी, छम-छम पायल,संगीत सुहाना सजता था। प्रेम कहानी, घर के झगड़े,पनघट ही पंचायत थी।सखियों के संग चुहल-ठिठौली,पनघट पर ही होती थी। पंछी, पथिक, … Read more

रिश्तों की संजीवनी अपनापन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* रूप चाँदनी भा रही, रही आज मन मोह।अंतर्मन में नेह है, हर पल है आरोह॥ सन्नाटा छाया हुआ, चुप है हर आवाज़।सुर भी सब मायूस हैं, खामोशी में साज़॥ हर दिल को तो भा रही, तेरी मृदु मुस्कान।हर दिल में रहती सदा, इसकी पावन आन। आँसू लगते नेक हैं, जब हो … Read more

उड़ना चाहता हूँ आसमान तक

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मन कुछ कहता है… (‘विश्व इच्छा दिवस’ विशेष)… मन कुछ कहता है…खामोशियों में भी एक शोर रहता हैइच्छाओं के दीप जलते हैं भीतर,हर सपना आँखों में चोर रहता है। कभी उड़ना चाहता हूँ आसमान तक,कभी धरती से जुड़कर ठहर जाता हूँमन के कोनों में अनगिनत ख्वाहिशें,हर रोज़ नई राह पर … Read more

तू तो कमाल

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** चाय तू तो कमाल ही करती है,सुबह की पहली चायहोंठों से कप को लगाते ही,दिल कह उठता है वाह चाय!तेरा तो कोई जवाब ही नहीं,एक कप चाय केवल दूधचाय पत्ती, चीनी का मिश्रण ही नहीं है,वरन् आपसी रिश्तों की शुरुआत हैचाय तू तो कमाल ही करती है…। सुबह-सुबह शरीर में ताजगी भर … Read more

जागो, अंधकार हरो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जागो, ज्वाला बन कर अंधकार का आवरण सब हरो,लिखो स्वर्णिम गाथा ऐसी, युग-युग तक स्मृति में धरोमिट्टी की सौंधी खुशबू जीवन का नाता हो गाढ़ा,राष्ट्र-प्रेम की वीणा लेकर हर दिल में तुम भक्ति भरो। सीमा पर जो अडिग खड़े हैं, उनमें साहस शौर्य भरो,डरो नहीं विपदाओं से, सत्य-सुपथ पर … Read more

ना जाने क्या हो तुम

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************* ना जाने क्या हो तुम,मेरे जीवन के हिस्से मेंकौन-सा भाग हो तुम,ना जाने मेरे क्या हो तुम। रहती हो अगर सामने,समय दूर हो जाता हैकब दिन हो कब रात,पता नहीं चल पाता है। मेरे घर की हो तुलसी,या जीवन में आई खुशीतुम जो भी हो,तुम्हीं हो मेरी हँसी। मेरे गमों … Read more

अपना कौन, सब अकेले

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ अब मन नहीं करता,किसी को अपना कहने कारिश्ते बेईमान-से लगते हैं,हर बात अपरिचित-सी लगती है। अब तो अपनी परछाई भी,पराई-सी प्रतीत होती हैआइने में अपना ही चेहरा,धुंधला, थका-थका दिखता है। हम भी अब खुद से,अनजाने हो चलेमन अपना नहीं रहा—बस अपने होने का आभास बचा है। पास बैठा इंसान भी,अब मनुष्य नहीं … Read more

आँसू बहा लेता हूँ मैं

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ दर्द बहुत है तेरे जाने के बाद,हर पल दुखों का साया नजर आता हैटूट चुका हूँ मैं इतना, समझ में कुछ नहीं आता है,अब बस तेरी यादों में ‘आँसू’ बहा लेता हूँ मैं…। तेरे साथ बीते वह पल भी अजीब थे,छोटी-छोटी ‘उंगलियों’ को पकड़ कर चलता थासाथी तू मेरा स्वाभिमान … Read more

मौसम का सितम

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मौसम सितम का हाल है ये,हर दिन रंग बदलते रहतेकभी प्रचंड ताप, गर्मी बढ़ाता,कभी रह-रहकर पानी बरसाताकभी आँधी लाकर मन-मौजीपन करता,कभी ओले, तो कभी तूफान लाता। जीना मुहाल हुआ है व्यक्ति का,गर्मी इतनी बढ़ी कि तापमान ४५ डिग्री जा पहुँचालगे जैसे अंगारों पर चल रहे हों,तापमान बढ़ता ही जा रहाअब कितने … Read more

रक्षा करें, लें संकल्प

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हरा-भरा पर्यावरण, धरती का श्रृंगार।वृक्षारोपण मिल करें, दें जीवन उपहार॥ रक्षण धरती प्रकृति की, हम सबका दायित्व।हरियाली हो हर जगह, तभी सृष्टि अस्तित्व॥ धरा धाम जीवन धुरी, सहे सभी संताप।करें नमन पृथिवी दिवस, गिरि तरु नदियाँ आप॥ मिट्टी जल वन वायु से, चलता जीवन चक्र।इनके बिन जीवन जगत, इन … Read more