आस लगाना बेवकूफी
कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ जगह-जगह बात बनाना भी बेवकूफी है,किसी से लगाव लगाना भी बेवकूफी है। काट-छांट हो शब्दों की अगर कहीं,ऐसे में बातचीत करना भी बेवकूफी है। जो किसी के दर्द को समझ ना सके,ऐसे रिश्तों से आस लगाना भी बेवकूफी है। जब मन हो साथ दे, जब चाहे छोड़ दे,फिर तो साथ बैठना भी … Read more