बीतता हुआ साल
दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* कभी हँसी कभी आँसू,कभी खामोशी, कभी बातों का समंदरजीवन के कई रंग,दिखा गया बीतता हुआ साल। कुछ रिश्ते गहरे हुए,कहीं बढ़ गई दूरियाँहर एक पल हर मोड़ पर,सबक दे गया बीतता हुआ साल। कभी सफलता की मिली तालियाँ,कभी असफलता की तन्हाइयाँगिरने और संभलने का तरीका,सिखा गया बीतता हुआ साल। किसी अपने का … Read more