तेरी वो प्यारी छवि

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* कण-कण गवाह मथुरा के,मेरे कृष्ण जन्म लिए वहाँअंगूठे पर खड़े होकर,भीड़-भरी आबादी में। जो देखा मैंने उस दिन,कृष्ण की अनोखी छवि वहाँकाले-काले घुँघर बालों वाले,हँसता-हँसता श्याम चेहरा। भूल न पाऊँ एक पल भी,तेरी वो प्यारी-प्यारी छविकाली-काली वो अनूप छाया,सिर्फ़ एक पल आँखों में बसी। आँखों के अंदर ही रहना,मेरा दिल तुझको … Read more

आप आराध्य हैं

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** आप हैं देवता, आप आराध्य हैं।भक्ति से हैं सुलभ शेष दु:साध्य हैं॥ सबके हित आपने है सदा विष पीया,आप त्यागी परम तब ही सब जग जीया।कर्म फल सबको देने को पर बाध्य हैं,आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥ सारी योनि में भोगों में ‌बस आप हैं,बह्म-चिंतन में योगों में … Read more

द्विमुख चेहरे

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मुझसे ही बातों की माला पिरोने का वादा करते,मुझे ही अपना संसार बताने का दावा करतेसच्चाई की छाया बन साथ चलने की बातें करते,और मुस्कानों के पीछे दूसरा मार्ग चुन लेते। “तुम ही मेरा विश्व हो” कहकर जताते अपनापन,पर दुनियाभर से भी रखते सम्बंधमुझे अनजान रखकर किसी और की चौखट … Read more

हमारी पीढ़ी छोड़कर…

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* आज के दौर में ‘सीनियर सिटीजन’कहलाती हमारी पीढ़ी है,आने वाले दस-पंद्रह बरस मेंजो लुप्त होने की कगार पर है,हमारी पीढ़ी बिल्कुल ही अलग हैयह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है। रात को जल्दी सोने वाली,सुबह को जल्दी उठने वालीभोर में टहलने निकलने वाली,आँगन में पौधों को पानी देने वालीपूजा के … Read more

कैसा मंजर आया ?

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* खुशियों के इस आशियाँ में, अब अँधियारा छाया है।मजबूरी के बँधन बन गये, कैसा मँजर आया है॥ दो रूह एक जान हुए थे, प्यार ही प्यार समाया था,आसमान के तारे भी तब, झोली में भर लाया था।बदले हैं ये तेवर इनके, कैसी छाई माया है,खुशियों के इस आशियाँ में, … Read more

बालियाँ और लोरियाँ

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* धीरे-धीरे विदा हो रही है संध्या बांधे पैरों में पायल,रुनझुन-रुनझुन पायल बजती जा रही है हरपलसरसर-सरसर पवन घूम रही, हल्की-हल्की हलचल,कभी छूती लताओं को, कभी छूती जा रही तरुदल। गेहुँओं की नवजात बालियाँ हैं बड़ी ही मासूम-मासूम,कंटीली रोयें पहनकर अभी झूमने लगी है गुमसुमलोरियाँ ही लोरियाँ गाई जा रहीं, हर प्रहर … Read more

हम तड़पा करते हैं

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** तुमसे मिलने की खातिर, ईश्वर से प्रार्थना करते हैं,जब सामने तुम आते हो, तुमसे ही हम पर्दा करते हैं। जब भी दूर जाते हो, मिलने को हम तड़पा करते हैं,तेरी नजरों में नहीं कीमत मेरी, बस हम रोया करते हैं। मेरे लिए बस तुम ही तुम हो, इसे निभाया करते हैं,ऐसा न … Read more

नारी का श्रृंगार ‘मर्यादा’

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मर्यादा जैसा नहीं, नारी का श्रृंगार।सबसे चोखी बात यह, है उत्तम उपहार॥ मर्यादा से नारियाँ, बन जाती हैं खास।मानो सब यह मान्यता, करो सभी विश्वास॥ शोभा बढ़ती नार की, मर्यादा यदि संग।आकर्षण हो चौगुना, बिखरें नित नव रंग॥ मर्यादा को धारकर, सीता बनीं महान।यह साँचा श्रृंगार है, जिसमें नारी-आन॥ मर्यादा से … Read more

फागुन का है जोर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रंगों ने अँगड़ाइयाँ, फागुन का है जोर।अपनापन रिश्ते मधुर, घुला मधुर रस भोर॥ फागुन का है जोर चहुँ, ढोलक बोले तान।गली-गली में गूँजती, जोगीरा की जान॥ फागुन का चहुँ जोर है, पिचकारी मुस्कान।धूप सुनहरी ओढ़कर, धरती रंग सुहान॥ फागुन का रस माधुरी, कोयल गाए राग।टेसू की लाली जगे, वन … Read more

खुशियों का सागर

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ वह ‘सोंधी’-सी महक,तुलसी के इस घर ‘आंगन’ मेंरोशनी की ‘ज्योति’ है बेटियाँ,वह ‘खुशियों’ का सागर है। हर घर की आन, बान और शान है वह,उनकी ‘मुस्कान’ हमारे घरों का सुख-चैन है‘ईश्वर’ ने भी उन्हें वहीं भेजा होता है,जिससे वह ‘खुश’ होता है, बेटियाँ ‘खुशियों’ का सागर है। बेटियाँ खुदा की … Read more