आहिस्ता-आहिस्ता
नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* आहिस्ता-आहिस्ता ही प्रेम का दीपक जलता है,अपने ही संस्कार मन को पावन करता है। मन में प्रेम रहे तो सारी दुनिया प्रेममयी लगती है,हर दु:ख जीवन में नई-नई राहें बनाता है। नई उमंगों का आगमन ही जीवन है,आहिस्ता-आहिस्ता ही फूलों-सा खिलने लगता है। संघर्ष ही जीवन को आगे बढ़ना सिखाता है,आहिस्ता-आहिस्ता … Read more