बिजी है फोन

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** आवाज आती है, ट्रिन ट्रिन ट्रिन,घंटी बजती है, फोन बिजी हैपता चलता है, इंसान बिजी है,यही फैशन है, फोन बिजी है। बात नहीं करना, मन नहीं है,दिखावा करना, फोन बिजी हैजरुरत हो तो, हर वक्त हाजिर है,दूसरों की जरूरत, फोन बिजी है। बातों को टालना, नेटवर्क नहीं है,जोर से बोलना, सुनना नहीं … Read more

मेरा मुझमें कुछ नहीं

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मेरा मुझमें कुछ नहीं, सब कुछ तेरी माया,साँसों की हर लय में, तेरा ही स्वर छाया।मैं कौन यहाँ स्वामी, तू ही रचयिता है-तू बीज, तू अंकुर, तू ही हरिताया। बंधन कालचक्र का, थामे पग-पग जीवन,मद मोह मरीचिकाएँ, हरती मन का यौवन।लोभ क्रोध की आँधी में, टूटे विश्वास सदा-तेरी कृपा … Read more

गली-गली धुंध

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** गाँव-गली, शहर-नगर तक छाया धुँआ-धुँध,ठंडे में सन्नाटा पसरा, प्रदूषित ओस की बूँदरुकी रफ्तार ट्रक, बस, कार की, धुंध आँखें मूंद,कश्मीर-हिमाचल की ठंड को छोड़ो बर्फबारी अंधाधुंध। ठिठुरन-जकड़न में जन जीवन, आँखें हुई है कुंद,शीतलहर से सभी त्रस्त थे, खेल रहे हैं बाल मुकुंदखेतों में हरियाली आई, सरसों पीले फूल … Read more

‘सहयोग’ मौन अनुबंध

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सहयोग वह मौन अनुबंध होता है,वह करुणा की अस्थाई छाया होता है। जो मनुष्य को मनुष्य तो बनाए रखता है,इस सभ्यता के कठोर तट पर। यह कोई दया नहीं होता है,जब इतिहास ने हड्डियों से हथियार पहली बार गढे़ होंगे। तब भी अस्तित्व के पक्ष में,भय के विरुद्ध, किसी ने किसी का … Read more

प्रेम चाहता हूँ…

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** प्रेम करना चाहता हूँ-उससे, जो सुकून दे…जिसके पास रूह हो प्यार भरी,जो समझे मन की थाहजो देखे मेरे प्रेम की राह। प्रेम करना चाहता हूँ-उससे, जो तैरे नैनों के सागर में…समझे अँखियों की आशा,हर पल महसूस करे मन की भाषाजो थाम ले बस मेरा हाथ,चले कदम-दर-कदम मेरे साथ। प्रेम करना चाहता … Read more

अपना-पराया

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ दिल सच्चा हो अगर, उसका सब अच्छा होता,ईश्वर पर हो भरोसा, उसका सब अच्छा होता। दिल में हो मुहब्बत, अगर तो कष्ट नहीं होता,ईश्वर पर भरोसा, कोई काम अधूरा कहाँ होता। अजब यह दुनिया है, कोई सच्चा नहीं होता,कृष्ण मिल जाए जग में, इन्सान सच्चा न होता। मन में होता है मेरा … Read more

कण-कण शोणित दूँ मैं माटी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* छोटा-सा जीवन पाया है, कर दूँ चरण समर्पित भारत,कालचक्र के घने तम में, दीप बने मानवता आरत।एक अभिलाष, एक ही आशा, कण-कण शोणित दूँ मैं माटी-लिखूँ स्वर्ण गाथा त्यागों की, अमर बने शुभ दुर्जय भारत॥ थोड़ा-सा यह जीवन पाकर, तन मन अर्पित चरणों भारत,विषम समय के तमस पथों पर, … Read more

…वो संकल्प करो

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… निभा सको, वो संकल्प करो,आज अभी इसी वक्त करोसबके प्रति अपने भाव को,सरल, शुद्ध, स्नेहिल करो। सफलता एक-एक सीढ़ी चढ़ो,तन-मन-धन से काम करोतूफान गति से कुछ नहीं होना,मंजिल तक धीरज से बढ़ चलो। संघर्ष का नया दामन थामो,उम्मीद का सुंदर पाठ गुनोनए वर्ष … Read more

लहू से लिखा गया लोकतंत्र

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** ढाका की गलियों में उठी जो आग,वह क्रोध नहीं-सत्ता का नागएक शहर नहीं, चेतना जली,लोकतंत्र की आत्मा छलनी हुई। सवाल पूछना बना अपराध,सच बोलना देशद्रोह का स्वादकानून खड़ा है आँखें मूंद,हाथों में सत्ता, दिल में क्रूरता की धुंध। धर्म ने ओढ़ा नफ़रत का जाल,राजनीति ने खोया नैतिक भालईश्वर का नाम … Read more

ठंड का अनुभव

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** ठंड का अनुभव मिला-जुला अनुभव,बहुत ही मुश्किल है इसका प्रभाव। हाथ-पैरों में कंपकंपी दिल चाहे गरमी,काम तो काम है, चाहे हो कितनी सर्दी। वक़्त पर कार्यालय, वक़्त पर विद्यालय,वक्त पर आवासीय, वक्त पर पुस्तकालय। कार्य न रूके, आस न टूटे, साथ न छूटे,सबका साथ जब मिले, आस संग न छूटे। चाय के … Read more