सपनों का शहर
दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* जहां रिश्तों में अपनापन हो,हर चेहरे पर मुस्कान होप्रेम की भाषा बोलें सब,नफरत की जहां जगह न होमेरे सपनों का शहर ऐसा हो…। तकनीकी के नए दौर में,जज्बात किसी के कम न होंबस मंजिल की दौड़ न हो,जीवन का सफ़र मजा भी होमेरे सपनों का शहर ऐसा हो…। कांक्रीट की दीवारों के … Read more