मृगतृष्णा में जीवन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मृगतृष्णा में भटके जीवन, लगी पेंच मस्तिष्क सुमति में,मिथ्याचारी छल प्रपंच तम, लगी जंग अस्तित्व प्रकृति मेंखो विवेक कर्त्तव्य भाव मन पेंच खोलने जड़ता अक्षम,गुमराही यायावर विचलित कहाँ सफलता सुख उन्नति में। कठिनाई ख़ुद आवाज़ बन भागमभागी हो जीवन में,खोते संयम साहस संबल तपते ख़ुद नित दावानल मेंसदा तिरोहित … Read more

धरा श्यामल भई

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** वसुंधरा शुष्क हुई, श्यामल ओढ़नी धरी,रूखी, हरियाली खोई, मैली बे-रंग हुई। हिम जाड़ा सांय-सांय, कीटक गजब ढाए,हेमंत राह चेताए, शरदंत वंदना। उल्लसित ऋतु प्रिय, उमंग सुहानी भए,ताप निंदित आदित्य, प्राणी चैतन्य भरे। कनक हरित धरा,अनावृत मणि धरा,अपार गुंजन धरा, सौरभ दिलकुशा। अदब हिम आतप, गज़ब हिम आतप,अलसाई हिम सर्वत्र, विलक्षणता … Read more

जीवन और प्रकृति

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* घाट-घाट नीर वायु, शीत प्रीत रहती थी,प्राकृतिक शीतलता, वादियाँ सजाती थीं। मानवीय स्वार्थ बने, मिट गए दृश्य सभी,नीर बिन बहा करे, दिखाती रेत नदी। सूर्य किरण से दिखे,नीर सतह स्वर्ण सी,चन्द्र किरण से वही, दिखे है रजत सी। स्वर्ण रजत एक ही, सतह पे दिखा किए,फर्क भोर रात भर, के … Read more

ख्याल बुरा नहीं

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** मत करो किसी की चिंता,अपनी मस्ती मेंमस्त रहो,किसी से कुछ न कहोख्याल बुरा नहीं। कहाँ बदलेगा जमाना,तुम खुद ही बदल जाओयही मन को समझाओ,ख्याल बुरा नहीं। हम प्यार करते रहे,वे किसी और के हो गएबेवफा को माफ कर दे,ख्याल बुरा नहीं है। माफ कर दो सबको,जिन्होंने गलती की है।जियो … Read more

विश्व विजेता भारतीय बेटियाँ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* विश्व क्रिकेट के व्योम क्षितिज पर, विजय पताका लहरायी है,बेटियाँ बनी परवाज़ भारती, महिला क्रिकेट जय पायी हैबनी खिलाड़ी भारत बेटी रनों का है अम्बार लगायी,महिला क्रिकेट सुनहर अतीत लिख भारत शान बढ़ायी है। अथक प्रयासों का प्रतिफल शुभ प्रथम बार विजय दिलायी है,गौरवमयी गाथा क्रिकेट जग भारत महिला … Read more

मधुर मिलन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** मधुर मिलन का शुभ दिन आयानव किसलय उपवन मुस्काया,धरा गगन का क्षितिज मिलन यहमुग्ध नयन किस पथ से आया। मृदु सुकुमार हृदय के सपनेसुधि से सुरभित किसी केअपने,मुग्ध पवन तू ले चल उस पथ धरा गगन जहाँ लगे हैं मिलने। शत वल्लरियाँ नत मस्तक हैंपुष्पों पर मधुकर गुंजन है,इन्द्रधनुष चितवन के ये … Read more

ठहरता नहीं वक़्त

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ वक़्त चल रहा अपनी चाल,हर समय हर प्रहर हर घड़ीउसने चलना ही सिखाया हमें,क्योंकि वक़्त ठहरता नहीं किसी के लिए। संसार की इस जीवित सोच को,इंसान कभी नहीं देखता हैअगर वह नहीं चलेगा वक़्त के साथ,तो खत्म हो जाएगा सब कुछक्योंकि वक्त ठहरता नहीं किसी के लिए। ज़िन्दगी के इन … Read more

अंदर से खाली क्यों ?

बबीता प्रजापति झाँसी (उत्तरप्रदेश)****************************************** खुश बाहर से हो,अंदर से क्यों खाली ?क्या तुमने भी भाग-भाग कर,जीवन की दौड़ लगा ली…। ये अंतस की वेदना,और दु:ख सारे सहनाक्या विजय खुद पर पा ली!यदि नहीं तोचहुँ ओर देखो,सूखे वृक्ष पर छाई पुनः हरियाली…। स्थाई क्या रहा है जीवन में,मुरझाए फूल खिले उपवन मेंदु:ख आया फिर सुख आएगा,जीवन की … Read more

खिलखिलाती वादियाँ

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** चल पड़ी चुपचाप सन-सन-सन हवाडालियों को यों चिढ़ाने-सी लगी,आँख की पुतली अरे खोलो जराहिल कली को यों जगाने-सी लगी। पत्तियों ने चुटकियाँ झट दी बजाडालियाँ कुछ डुलमुलाने-सी लगी,किस परम आनंद-निधि के चरण पर,विश्व साँसें गीत गाने सी लगीं। जग उठा तरु-वृंद सुन यह घोषणा,रश्मियाँ कुछ झिलमिलाने-सी लगीं।हो रहे जीवंत सारे चर-अचर,वादियाँ अब … Read more

भक्ति भाव

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** मत बन तू छलनी के जैसा सार बहा दे‌ असार धर,जैसे दुर्जन गुण को त्यागें अवगुण राखें संभार कर। सांचे भक्त हों सूप के जैसे कूड़ा बाहर सार अंदर,माया कूड़ा सार प्रभु जी प्रभु गुण गाऐं पुकार कर। जो भी मुक्त न होना चाहें माया-मोह के बंधन से,आसक्ति संसार … Read more