धूप और छाँव
गरिमा पंत लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** धूप और छाँव की लुका-छिपी, कितनी अच्छी लगती है। धूप में जब थक जाओ, छाँव शीतलता देती है। धूप जीवन का कठोर समय है, छाँव ढलती शाम है। हे मानव ! तुम धूप से क्यों घबराते हो, कठिन परिश्रम करके तुम अपना भाग्य बनाते हो। छाँव में जब तुम सबके साथ, … Read more