आप आराध्य हैं

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** आप हैं देवता, आप आराध्य हैं।भक्ति से हैं सुलभ शेष दु:साध्य हैं॥ सबके हित आपने है सदा विष पीया,आप त्यागी परम तब ही सब जग जीया।कर्म फल सबको देने को पर बाध्य हैं,आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥ सारी योनि में भोगों में ‌बस आप हैं,बह्म-चिंतन में योगों में … Read more

द्विमुख चेहरे

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मुझसे ही बातों की माला पिरोने का वादा करते,मुझे ही अपना संसार बताने का दावा करतेसच्चाई की छाया बन साथ चलने की बातें करते,और मुस्कानों के पीछे दूसरा मार्ग चुन लेते। “तुम ही मेरा विश्व हो” कहकर जताते अपनापन,पर दुनियाभर से भी रखते सम्बंधमुझे अनजान रखकर किसी और की चौखट … Read more

हमारी पीढ़ी छोड़कर…

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* आज के दौर में ‘सीनियर सिटीजन’कहलाती हमारी पीढ़ी है,आने वाले दस-पंद्रह बरस मेंजो लुप्त होने की कगार पर है,हमारी पीढ़ी बिल्कुल ही अलग हैयह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है। रात को जल्दी सोने वाली,सुबह को जल्दी उठने वालीभोर में टहलने निकलने वाली,आँगन में पौधों को पानी देने वालीपूजा के … Read more

बालियाँ और लोरियाँ

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* धीरे-धीरे विदा हो रही है संध्या बांधे पैरों में पायल,रुनझुन-रुनझुन पायल बजती जा रही है हरपलसरसर-सरसर पवन घूम रही, हल्की-हल्की हलचल,कभी छूती लताओं को, कभी छूती जा रही तरुदल। गेहुँओं की नवजात बालियाँ हैं बड़ी ही मासूम-मासूम,कंटीली रोयें पहनकर अभी झूमने लगी है गुमसुमलोरियाँ ही लोरियाँ गाई जा रहीं, हर प्रहर … Read more

हम तड़पा करते हैं

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** तुमसे मिलने की खातिर, ईश्वर से प्रार्थना करते हैं,जब सामने तुम आते हो, तुमसे ही हम पर्दा करते हैं। जब भी दूर जाते हो, मिलने को हम तड़पा करते हैं,तेरी नजरों में नहीं कीमत मेरी, बस हम रोया करते हैं। मेरे लिए बस तुम ही तुम हो, इसे निभाया करते हैं,ऐसा न … Read more

खुशियों का सागर

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ वह ‘सोंधी’-सी महक,तुलसी के इस घर ‘आंगन’ मेंरोशनी की ‘ज्योति’ है बेटियाँ,वह ‘खुशियों’ का सागर है। हर घर की आन, बान और शान है वह,उनकी ‘मुस्कान’ हमारे घरों का सुख-चैन है‘ईश्वर’ ने भी उन्हें वहीं भेजा होता है,जिससे वह ‘खुश’ होता है, बेटियाँ ‘खुशियों’ का सागर है। बेटियाँ खुदा की … Read more

इतनी प्रीत क्यों अंगूर की बेटी से

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* तुम प्रीत इतनी क्यों करते हो,अंगूर की बेटी सेवह तो है एक मीठी छुरी,अपनी गिरफ्त में कस लेती। जो हर एक भोले-भाले को,पहले तो हँस-हँस केपिलाती जाम अपने नाम से,फिर बड़ी उमंगें, बड़ी तरंगें। उड़ती है सिर्फ नाम से,आकर्षण से हीखिंचे-बंधे आ जाते,कितने पास तेरे। हँसी-हँसी में पी कर,बन जाते हैं … Read more

मन में सौ-सौ द्वंद चले

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** माँ-बाप की छाँव तले,बड़े प्यार से हम थे पलेज्यों-ज्यों अपनी उम्र बढ़ी,दबते गए हम बोझ तले। बड़ी-बड़ी चाहत थी मन में,और दुनिया रंग-रंगीली थीहरदम खुशियाँ ही मन भाए,पर सुख-दु::ख बनी सहेली थी। ख्वाब सुनहरे थे देखे, और,हर चाहत से उम्मीद जुड़ीअरमानों के पंख लगे थे,ख्वाहिश रह न जाए अधूरी। पर चाहत पर … Read more

नहीं मानना हार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सुन लो बच्चों ध्यान सेनहीं मानना हार,बोर्ड परीक्षा देनी हैहो जाओ तैयार। जीवन तुम्हें बनाना सुंदरतनिक परिश्रम करना,ध्यान से पढ़ना पाठ तुमनहीं तुम्हें है डरना। रात को सोने से पहलेएक बार सब पढ़ लेना,प्रातः उठ कर फिर तुमउसे रिवाइज कर लेना। पेपर मिलते ही पहलेतुम ईश्वर को याद करो,पहले प्रश्न सभी पढ़ … Read more

एपस्टीन फाइल्स

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* बेगुनाह चीखें जब गूँज उठी,परतें-दर-परतें उधड़ गईनरभक्षियों की ‘एपस्टीन फाइल्स’,कालिख बन जग में पसर गई। ये वीभत्स तमाशा कहाँ हुआ ?शीशे-सा कानों में उतर गयाधरती सुन जैसे चटक गई,मन पीड़ा से शर्मसार हुआ। कई चेहरों से नक़ाब उड़े,काले मुखड़े एकसाथ दिखेजो लगते थे प्रेरक सबको,वो गंदी नाली के कीट लगे। भोगों … Read more