मन का सुकून

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* सुकून कोई जगह नहीं एक अहसास है,जो मेरे लिए कदम-कदम पर खास है। हरेक इंसान को बस शोहरत की चाह है,दुनिया में हर शख्स यहाँ दौलत का दास है। अब तो मैंने खुद ही खुद से सुलह कर ली,जीवन का हर लम्हा लगता मधुमास है। सुकून वह नहीं, जो … Read more

दुआएँ माँ की

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)************************************* ऐ मेरे बच्चे,मरकर भी दूँगी तुमको दुआएँजिस पल तुम मुझे याद करोगे,मैं साया बनकर साथ रहूँगी। अचानक जब जिह्वा पर,आएगा मेरा नाममैं साया बनकर साथ रहूँगी,तेरे संकल्प बनकर आ जाऊँगी। घनघोर अँधेरा हो,या घनघोर निराशाजब सूझे न कोई राह,मैं आशा बनकर आ जाऊँगी। उस पल जब तुम याद करोगे,मैं साया बनकर … Read more

मौन

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)******************************************** बोलो मोहनकब तक मौन,दर्शक बने रहोगे ? कोई वेदनाक्यों छूती नहीं चेतना,पीर कब दूर करोगे ? घर बाहरकहाँ जाऊँ किधर,कब पुकार सुनोगे ? कैसे क्या करूँस्वयं को सुरक्षित रखूँ,संबल कब तुम बनोगे ? अति हो गईधरती शर्मिन्दा हो गई,अब कब समझोगे ?

सतगुरु की खड़ी है नैय्या‌

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************* सतगुरु की खड़ी है नैय्या तू नाम धन दे के चढ़ जा,नाम धुन में मगन रह निसदिन प्रभु की ओर बढ़ जा। स्मरण में गुरु चरण सिर माथे चरण की रज,है विकट मायाशक्ति प्रभु की प्रभुनाम पे बस तू अड़ जा। पाप की गठरिया सिर राखी जनमों-जनम‌ से, फेंक तुरत-फुरत … Read more

सुकून मिलता नहीं

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक)************************************************* सुकून मिलता नहीं जग के सुनहरे  आशियानों में,वह स्वयं खिलता सदा निष्काम मन के उपवनों मेंनिर्मल अंतर्मन ही शांति का शाश्वत निवास बनता है,प्रेम की सरिता बहे तो सुख उतरता प्राणों में। धन-संपदा से कब किसी का रिक्त अंतर भर सका,लोभ की आँधी में कोई शांति-पुष्प  कब झर सकासंतोष का दीपक जहाँ नित्य धैर्य … Read more

अन्तर क्यों ?

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)************************************* नींद एक है अमीर और गरीब की, प्यास एक है अमीर और गरीब की।  माँ एक है अमीर और गरीब की,छाया एक है अमीर और गरीब की।  काया एक है अमीर और गरीब की,पीड़ा एक है अमीर और गरीब की।   खून एक है अमीर और गरीब का,रिश्ता एक है अमीर और गरीब का।  पानी एक … Read more

आह

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)************************************** वेदना के तार को तुम,मत ही छेड़ो बार-बार  घायल हो जाते हैं,मेरे प्राण बार-बार। सोई हुई है वेदना,जो लुप्त हो चुकी है दिल में  गड़े मुर्दे उखाड़ने से,क्या होगा फायदा तुम्हें ? रूह कांप जाती है,जब याद आती है  कितनी हृदय बातें,वो दहशत भरी रातें  वो तड़पती आहें। जब अपने ही,नजर आने लगे बेगाने  रह-रह कर,वह … Read more

पंचामृत जीवनभर घोलिए

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक)************************************************* सत्य-सुधा से अंतर्मन का आँगन नित्य सींचिए,प्रेम-सुगंधित भाव सभी के ज़िंदगी में खींचिएपाँच सद्गुण मिले मानव का अंतस उज्ज्वल करते, सेवा-सरिता बहती रखकर जग का तामिर भींचिए। दूध-धवल से शुद्ध विचारों का दीपक जलाइए, साहस-धैर्य से हर संकट का पथ  हँसकर टालिएनिर्मल चरित नित जीवन की सबसे बड़ी निधि रहता, घृत-तेजस्वी कर्मों से हर दिशा नई उजालिए। मधु-सी मीठी वाणी से हर अपना मन जीतिए,शर्कर-सरल स्वभावों से कटुता  सभी मिटाइएविनम्र हृदय मानव को देवत्व अधिकारी करता, करुणा की पावन धारा से जगत का मन प्रीतिए। … Read more

जगन्नाथ दर्शन दे दो

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** दिल करता है जगन्नाथ जी, दरस आपका पा जाऊँ,इतनी हिम्मत दे दो मुझको, कभी उड़ीसा आ पाऊँ। रथ की रस्सी को खींचूँ, और अपना जीवन धन्य करूँ,एक बार तो बुला लो प्रभु जी, तुमसे आज गुहार करूँ। चमत्कार जो सुने तुम्हारे, मुझे चकित कर देते हैं,दरस तुम्हारा करने को प्रभु, मेरे प्राण … Read more

खो गया हूँ

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ******************************************** खो गया हूँ मैं संसार में मोह माया के बाजार में,चारों ओर रिश्तों का मेला है-मेले के बीच मन मेरा अकेला है। हँसता हूँ सबसे, हँसाता हूँ सबकोगम को छिपाकर गले लगाता हूँ, दौड़ रहा हूँ हर रिश्ते निभाने में-पर हार रहा हूँ स्वार्थी जमाने में। सबको संभाला अपना समझकरसभी संग चला … Read more