प्रकृति बिलबिला रही

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** पढ़ा-लिखा मानव है, लेकिन है कितना नादानभीड़ लगी है वहाँ, जहाँ है ए.सी की दुकान।वहीं पास में एक मनुज पौधे लेकर बैठा है,पढ़ा-लिखा मानव तो अहंकार में ही डूबा ऐंठा हैनहीं जानता पौधों से ही वृक्ष बनेंगे,वृक्ष बड़े होंगे तो वे ऑक्सीजन देंगेकार्बन को सोखेंगे और छाया भी देंगे,अपनी कोटर में पंछियों … Read more

पुस्तकों में जीवन का सार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** पुस्तकों में लिखित ज्ञान जीवन का सम्पूर्ण सार होता है,पुस्तक के लेखन में कई साहित्यकारों का अनुभव समाहित होता है। पुस्तक ज्ञान है, आरम्भ और अंत है,इतिहास है पुस्तक, काल समाज का दर्पण है। दुनिया के भावी विकास का अंकुरण है पुस्तक,बुद्धि का उत्कृष्ट स्रोत है, ज्ञान की गंगा है पुस्तक। पुस्तक … Read more

चाय का जादू चल जाता

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… मई-जून का गर्म महीना,गर्म हवा भी खूब सतातीउफ्, ओह सब हुए विकल,तन को चाहे झुलसाती। नींबू पानी और गन्ने का ज्यूस,छाछ, शिकंजी सबको भातीसबके अपने-अपने गुण हैं,पर संतुष्टि चाय से आती। हाड़ कंपाती ठंढक हो, फिर,जैसे बिस्तर पर आँख खुलीबड़ी मन को राहत दे जाती … Read more

बस चाय मिल जाए…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… हर कोई इसका है दिवाना,मेल-मिलाप का ‘सीधा’-सरल खजानाइसके लिए कोई नहीं करता मना,बस चाय मिल जाए, सुबह-शाम-दोपहर…। एक ‘प्याली’ इसकी, पीते ही सुकून आ जाए,घर हो, बाजार या आफिस-दुकान, हर जगह मिल जाएचाय व्यवहारिक जीवन में, आपसी तालमेल है बढ़ाए,बस चाय मिल जाए, … Read more

कैसी है जीवन की पहेली ?

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कैसी है ये जीवन की पहेली,सब साथ में फिर भी अकेली। दिल कहीं भी लगता नहीं,भीड़ में भी होती हूँ अकेली। न झूठ बोलूँ और न करूँ फ़रेब,खाली नहीं रहती कभी जेब। दिखावा भी हमें आता नहीं,चापलूसी कभी सीखी नहीं। जो हूँ, जैसी हूँ होता है नाज,इसलिए मेरा कोई नहीं आज। यूँ … Read more

चाय के दीवाने थे

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)…. चाय की दुकान पर अक्सर चर्चे होते थे,हम दोनों भी चाय के दीवाने थेप्रतिदिन मिलने के बहाने थे,सर्दियों के मौसम में। सुबह-सुबह एक ही डिमांड थी,कहाँ है अदरक वाली चाय ?रिमझिम-रिमझिम बारिश में होती,मेरे हाथों में अदरक वाली चाय। और दिल में होती याद … Read more

वाह चाय

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… हाय रे चाय, वाह रे चाय,सुबह से तेरी याद सताएबिन तेरे रहा ना जाए,गरमा-गरम जब तू आए,क्या कहें दिन बन जाए। देख के तुमको मन ललचाए,मिले ना तू तो सर चकराएसुबह-शाम तू ही भाए,बिन तेरे मन भरमाएहाय रे चाय, वाह रे चाय। जो तू आए … Read more

चाय में गुण अनंत

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)… चाय में गुण अति अनंत,सत्कारों को करे जीवंतरक्तचाप का करता अंत,मधुर व्यवहार रहे बेअंत। चाय पर बातें हों धुआँधार,मित्र के संग हो मस्त बहारघंटों बातें बिन लिए आहार,बाबू, लिपिक हो या सरकार। चाय बिना सूना सब संसार,चाय तत्व है अति दमदारकई रोगों … Read more

मध्यरात्रि का सूरज

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* जहाँ अंधकार ने दरवाज़े पर,जंजीरें डाल रखी थींवहीं आपका जन्म हुआ,आपने पूछा कि कुछ लोगों कोज़मीन पर क्यों रेंगना पड़ता है ?किताबों को कवच और,कानून को प्रकाश मानकरअंतहीन रात में आपने रास्ता बनाया। उन्होंने आपकी जाति को तौला,आपकी योग्यता या बुद्धि को नहींलेकिन आप इतने ऊँचे खड़े रहे कि,कोई चाहकर आप … Read more

सच्चाई

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* झूठ का नकाब उतारा तो,असली चेहरे दिखने लगेजिन्हें हमने समझा अपना,हमसे ही नजरें चुराने लगे। नये ज़माने की दौड़ में,अपनों को पीछे छोड़ दियाजिससे मिले फायदा,बस वही अपने लगने लगे। भावनाएं सबकी मर चुकी,संवेदनाएं ख़त्म हो गईंदान देने से ज्यादा लोग,दान का दिखावा करने लगे। परिवार से हुआ करती थी,रौनक घर कीघर-परिवार … Read more