मेरे मन!
संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* खो गया बचपन,धीरे-धीरे जवानी भीखिसकती जा रहीज़िंदगी का नया पड़ाव,सामने आ खड़ा हैइसलिए दुःखी मत होमेरे मन…। थोड़ा-सा हँस दे,थोड़ा-सा रो लेथोड़ा-सा दौड़ ले,थोड़ी-सी मस्ती कर लेबेकार ही वक्त गंवाया,बेकार ही बड़े हो गएइस तरह की बातें बेतुकीसोचना बंद कर दे,मेरे मन…। सारे बंधन अब तोड़ दे,ध्यान रहे यह दुनियातुम्हारे लिए … Read more