नहीं मानना हार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सुन लो बच्चों ध्यान सेनहीं मानना हार,बोर्ड परीक्षा देनी हैहो जाओ तैयार। जीवन तुम्हें बनाना सुंदरतनिक परिश्रम करना,ध्यान से पढ़ना पाठ तुमनहीं तुम्हें है डरना। रात को सोने से पहलेएक बार सब पढ़ लेना,प्रातः उठ कर फिर तुमउसे रिवाइज कर लेना। पेपर मिलते ही पहलेतुम ईश्वर को याद करो,पहले प्रश्न सभी पढ़ … Read more

एपस्टीन फाइल्स

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* बेगुनाह चीखें जब गूँज उठी,परतें-दर-परतें उधड़ गईनरभक्षियों की ‘एपस्टीन फाइल्स’,कालिख बन जग में पसर गई। ये वीभत्स तमाशा कहाँ हुआ ?शीशे-सा कानों में उतर गयाधरती सुन जैसे चटक गई,मन पीड़ा से शर्मसार हुआ। कई चेहरों से नक़ाब उड़े,काले मुखड़े एकसाथ दिखेजो लगते थे प्रेरक सबको,वो गंदी नाली के कीट लगे। भोगों … Read more

उतर आया मधुमास

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* आ गया बसंत प्रिय सखी, खोलो मृदुल नयन,छलक रहे जाम सृष्टि में, जरा करो आचमनकोमल-सी हँसी तुम्हारी जैसे कोमल किरण,गालों पर बिखरी लाली, उजला-सा अंतर्मन। अधर पर ले मुस्कान, छुओ बसंतिया तन-मन,मुस्कान सुन तुम्हारी, पुलकित भी होगा गगनहोंठों पर ये प्रिय तुम्हारे, उतर आया मधुमास,गुलमोहर की लाली लेकर, बहुत बने है … Read more

नारी की पहचान रंगों में

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** रंगों की उन्मुक्त हवाएँजब आती हैं,फागुन का संदेश,फिर वो लाती हैंआँगन-आँगन जब गूँज उठते हैं,उमंग, स्नेह और हँसी के फव्वारे विशेष। पर होली इस बार कुछ कहती,नारी की पहचान रंगों में भी हो जातीवह गालों पर गुलाल से ज्यादा,अपने सपनों को रंगतीकोमल मुस्कान को दृढ़ बनाती,मीरा-सा अटूट विश्वास है‌ रखतीदुर्हर मन में … Read more

मुझे नहीं फ़िक्र मेरे प्रियतम

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* मेरे सपनों में जो आते, वही हैं मेरे प्रियतम,हूँ मैं एकमात्र उनकी, वह मेरा यह अधिकार सदा, अब परस्पर ही प्रियतम। वे मिलें या न मिलें, इसकी चिंता नहीं है अब मेरे प्रियतम,प्राणों का सौदा हो गया अब क्षण में, कुछ ऐसे ही मेरे प्रियतम। अब मैं जीती हूँ सिर्फ उनके … Read more

कुछ तो बात होगी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** फूलों की खुशबू मेंतितलियों ने बताई होगी,हवा प्रेम की चली तब होगीकलियों को बालों में,जब उसने वेणी लगाई होगी।खिल जाएंगी कलियाँ भीसूरज ने किरण दिखाई होगी,नादान भौंरे कर रहे बेवजह शोरये नज़ारे देख तितलियाँ भीमुस्काई होंगी।रंग-बिरंगे रंगों में रंगा उपवन,मानों अभी से होली आई होगी॥ परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ … Read more

मेरा कान्हा गुलाब का फूल

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** मेरा कान्हा तो है गुलाब का फूल,देखो जब उसके मुख सृष्टि समूल। कान्हा जैसा प्यारा कोई नहीं है,सबके कष्टों को तो सुनता वही है। उसकी प्यारी बाँसुरी की वो धुन,जो भी सुनता हो जाता है मुग्ध। जब वो माखन लिपटाए अपने मुख,देख यशोदा मैया को अपार मिले सुख। गैया चराए मेरा नन्हा-सा … Read more

रंगों का त्योहार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** रंजिशें जो थी बरस में,वह मिटाने आ गयाहोली का त्यौहार देखो,रंग लेकर आ गया। बड़ा ही विमोहक ये,भावमय त्योहार हैगृह, नगर और ग्राम बस,उल्लास ही उल्लास है। हर तरफ़ है रंग वर्षा,ढोलकों की थाप हैकुमकुमों की मार से,सुरभित गोरी के गाल हैं। आज दिन रोते हुए को,भी हँसा देते हैं लोगभंग का … Read more

बेचैनी क्यों है इतनी ?

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* बेचैनी क्यों है इतनी, जब हर समस्या का हल है,आज परेशान हो जितना, उतनी ही खुशियां कल है। सुख दुःख है आनी-जानी, यही सत्य अटल है,चिंताओं में गुम ना होना, मन आवारा बादल है। मत भागो भौतिकता के पीछे हरदम,लुफ्त उठाओ जीवन में हर पल, यही संपत्ति अचल है॥

उसने तोड़ा विश्वास को

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* वह छल पर छल करता आया, उसने तोड़ा विश्वासों को,कश्मीर तो क्या हम पाकिस्तान भी क्यों देंगे गद्दारों को। इस जेहादी नाजायज को, चैन से सोने ना देंगे,लातों का भूत है बातों से मानेगा ना, समझाने से। इसको इसकी भाषा में समझाना हमको आता है,बुझदिल और इस कायर को … Read more