मिठास अब पहले सी नहीं

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************ अमृत की रात (शरद पूर्णिमा विशेष)… शरद पूर्णिमा की रात रंगीन होती नहीं,शरद चाँद में भी पूरा चाँद होता नहीं। महबूब में भी प्रेम पूरा होता कहाँ,हर मुलाकात में भी खुशियाँ होती नहीं। तारे बिखरे हैं पर चमक होती कम,अब तो मुलाकात में भी प्रेम होता नहीं। फिर से कटोरी सजाई है … Read more

भीतरी ‘रावण’ अनाचारी

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष)…. घृणित व्याल ‘दुष’ दुराचारी,चित्तधूर्त, चपल, व्यवहारीभीतरी रावण है अनाचारी,ओढ़ व्यग्रता, नाहक लाचारी। काम-क्रोध, लोभ-मोह के घेरे,भीतर स्थित, अंध मस्ती घेरेरक्तबीज, सम बढ़ते घेरे,अगणित दैत्य विवेक घेरे।   चाह अकारण दनुज होए,दश;आनन अविवेकी होएबुराई दहन प्रतिवर्ष होए,दुर्गम राक्षस भस्म न होए।    दशहरा उत्सव उत्साह जगाए,उन्माद जुगुप्सा हर्ष … Read more

एक सुरमई शाम में…

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)**************************************** एक सुरमई शाम में देखा है आज दूर से,उसका हँसता चेहरा, आहिस्ता-आहिस्ताआसमान ने ओढ़ ली शाम रंग की चुनरी,मेरा मन मुस्कुरा उठा, उसे सामने पाकर। एक सुरमई शाम में,दिल बेचैन रहता है उसके दीदार के लिएमेरी निगाहें मचलती रहती हैं उसके पास जाने को,आँखों में बसा रहता है उसका हँसता चेहरा। … Read more

कहाँ गये वो दिन…!

राधा गोयलनई दिल्ली********************************** अमृत की रात (शरद पूर्णिमा विशेष)…. शरद पूर्णिमा की संध्या को खीर बनाया करते थे,बीचों-बीच उसे आँगन में ऐसे स्थान पे रखते थे। जहाँ चाँद की मधुर रश्मियाँ आकर खीर को स्पर्श करें,देख चाँद की मधुर चाँदनी, दिल में मधुर हिलोर उठें। कामदेव और रति, चन्दा की ओर निहारा करते थे,हाथ जोड़कर … Read more

बुजुर्गों का सम्मान ही परिवार का अभिमान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बुजुर्गों से घरों की शोभा, उनसे घर का मान रहे,उनके अनुभव के दीपों से, रोशन हर इंसान रहेनई पीढ़ियाँ भूल न जाएँ, जड़ों से जुड़ने का अर्थ,बड़ों का सम्मान जहाँ हो, वहाँ संस्कार महान रहें। जीते-जी दो रोटियाँ कम, पर दो  मीठे बोल उन्हें,मत बाँटो घर की संपद, बाँटो प्रेम अनमोल उन्हेंमरने पर तस्वीर सजाकर, आँसू बहाना है व्यर्थ, मान दो तुम आज बुजुर्गों, बाद न  देना मोल उन्हें। मोबाइल में जग भर अपना, घरों में बुजुर्ग पराये,जिनकी उँगली पकड़ चले थे, उनको ही … Read more

संकटमोचक भारत वीर

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)************************************************* ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का पावन मंत्र जहां गूंजता,वसुधा के हर प्राणी में जो ईश रूप को पूजता। वही पुरातन संस्कार, फिर नभ की छाती पर चमका,जब संकट में घिरे गगन पर भारत का गौरव दमका। एक सौ चौहत्तर प्राण हवा में डोल रहे थे अम्बर पर,छल की खूनी छुरी तनी … Read more

मन का रावण

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************** भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष)… त्रेतायुग बीता द्वापर आया,द्वापर युग बीता तो कलियुगहर युग में रावण ने लिया जन्म,दुखी किया जग को उसका कर्म। त्रेता युग में आया था एक रावण,प्रभु राम ने किया था उनका संहारद्वापर युग में दो-चार रावण आए,कृष्ण ने किया उन सबका सफाया। कलियुग में बसा … Read more

कब तक छलोगे ?

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पद का मद, सत्ता का दंभ, कब तक जग को छलोगे ?लोभ, मोह, हिंसा विष से कब तक अमृत घोलोगे ?पुतले जलाकर क्या होगा, मन के असुर को मारो!महिषासुर! चेतो, वरना, ख़ुद कर्मों  से हारोगे! नारी निर्बल मत समझ, वह दुर्गा, महाकाली है,करुणा में गंगा की धारा, समर  प्रलय ज्वाला है।अस्मिता पर वार किया तो अन्यायी  नाश होगा,नारी सम्मान जहाँ है, वहीं विजय  की लाली है। मुख पर … Read more

बेटी बचाओ तो दुर्गा बचेगी

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)***************************************** बेटी बचाओ तो दुर्गा बचेगी,आज के जमाने में बेटी को बचाओबेटी ही दुर्गा होती, शक्ति होती,मोदी जी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’नारा बुलन्द किया जो सुपर बेटी नारा था,बेटी के उत्थान के लिए जरूरी। पढ़ाई अति आवश्यक है बेटियों की,अपने पैरों पर खड़ा करने की जरूरत हैजिससे किसी पर निर्भर होना … Read more

रामायण वही, रावण नए

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)********************************** भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष) …. हर साल रीत वही दोहराते,हर साल दशहरा आता है,रावण का पुतला जलता हैपर रावण बच ही जाता है। कैकेयी का मोह आज भी,रिश्तों में दीवार उठाता हैमंथरा बनकर कोई अपना,कानों में विष भर जाता है।रावण का पुतला जलता है,पर रावण बच ही जाता है…॥ स्वर्ण-मृग के … Read more