नाजनीन संध्या
संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* धीरे-धीरे विदा हो रही है संध्या बांधे पैरों में पायल,रुनझुन-रुनझुन पायल बजती जा रही है हरपलसरसर-सरसर पवन घूम रही, हल्की हल्की हलचल,कभी छूती लताओं को, कभी छूती जा रही तरु दल। गेहुँओं की नवजात बालियाँ है बड़ी ही मासूम-मासूम,कंटीली रोएं पहनकर अभी झूमने लगी है गुम-सुमलोरियाँ ही लोरियाँ गाई जा रही, हर … Read more