स्वर-दीप

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** ‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)… गूँजती है जब भी कोई मधुर तान,याद आती है आशा की पहचानमहकते हैं सुर जैसे फूलों की तरह,बसती है जिनमें संगीत की जान। बहती हैं हवाएँ जब रागों में ढलकर,छू जाती हैं दिल को हल्के से पलकरसजती है हर धुन उनकी अदाओं … Read more

आँखों में बस एक ही सपना

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ डॉ. भीमराव आम्बेडकर जयंती विशेष… मन में इच्छा आँखों में चमक,श्यामला रंग आँखों पर चश्मा कद था छोटा१४ अप्रैल १८९१ को जन्म लिया था, महार जाति का था,नाम था जिसका भीम सकपाल। भेदभाव, सामाजिक रीति-रिवाज,सबको बदलने चला था वह बच्चा महानना कोई पढ़ने देता उन्हें, पर वह न हारे,कर दृढ़ निश्चय किया, … Read more

बाबा साहेब तुम्हें प्रणाम

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* डॉ. भीमराव आम्बेडकर जयंती विशेष… माता श्रीमती भीमा बाई,पिता राम मालो सकपाल१४ अप्रैल १८९१ को,जिनके घर आया धरती का लाल। महू छावनी जन्म स्थल,अम्बा बाड़े जिनका ग्रामछुआ-छूत के लिए,जीवनभर किया संग्राम। पीएच-डी. कर अर्थशास्त्री बने,भारत का बढ़ाया मान‘बाबा साहेब’ डॉ. आम्बेडकर ने,देश-हित में किया संविधान निर्माण। गरीब असहाय के जीवन में,फूँके फिर … Read more

कल्याण करो हे! दया निधे

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** तुम दीन-दुःखी के रखवारे,कल्याण करो हे! दया निधेभव पार न कोई मुझे उबारे,सन्ताप हरो हे! दया निधे। तुम व्याप्त सकल हो अविनाशी,तुम परम पिता घट-घट वासीतेरी आस छोड़ कर जाऊँ कहाँ,विश्वास बनो हे! दयानिधे। तुम ही तो राम-रमैय्या हो,तुम ही तो कृष्ण-कन्हैया होअब व्याकुल हृदय रहे तुम बिन,उद्धार करो … Read more

पत्तों की सरसराहट

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** ये कौन-सी आवाज है,जो जानी-पहचानी सी लगती। हवा से पेड़ों के पत्ते की सरसराहट,कोयल की कूक मेंदब-सी जाती वो आवाज,जो जानी-पहचानी सी लगती। तालाब में खिले कमल,लगते ऐसे जैसे किसी नेपैरों में महावर लगाई होसूरज के उदय होने की लालिमा,जैसे बादल ने अपना रंग बदला हो। मैं इन फिजाओं में तुम्हें … Read more

माँ की थी वह प्यारी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** माँ की थी वह प्यारी लल्लीनहीं कबूतर चिड़िया बिल्ली,तितली-सी वह घूम के आतीमाँ उसको रहती सहलाती। चीर-हरण एक बार हो गयाकृष्ण न आए मौन सो गया,दु:ख देने वाला था अपनाटूटा उसका सारा सपना। व्यथा हृदय की कही न जाएविकल वेदना बहती जाए,प्रलय मेघ पहचान बन गईमातृ-नेह निर्वाण बन गई। प्रभु मेरे अब … Read more

पंछी की पुकार

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** प्यासे पंछी की पुकार, दाना-पानी की बौछार,दाना चुग पानी पी कर, पंछी उड़ते पंख पसार। छत गलियारा खेत खलिहान, उड़ जाते पंछी नादान,जहां भी दिखता पानी दाना, उड़ कर आते ये विहंग। सुबह होते कलरव करते खग, जिससे जागे सारा जग,चहचहाहट प्यारी लगती, अंधियारा दूर भागे अब सब। एक गौरैया प्यासी आई, … Read more

पेड़ बनो

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* बन सको तो पेड़ बनो,सीखो इनसे देनापरहित में जिसने सदा,सीखा सब कुछ अपना देना। अपनी शाखों में पंछियों को,देते स्नेह बसेराइनकी शीतल छाँव तले,कितनों ने डाला डेरा। जब तक रहता अस्तित्व इनका,प्राण-वायु ये देतेतपती धूप में राहगीरों को,शीतल छाया देते। क्षमा भावना इनसे सीखो,पत्थर खाकर भी फल देतेमीठे फल से भूख मिटाते,शीतल … Read more

शान्ति स्थापित, लोक मंगल

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** युद्ध और शांति: जरूरी क्या ?.. युद्ध संहार सदा सर्वदा,होती न शान्ति, परिणाम भयावहयुद्ध वैमनस्य, विरोध परिणाम,युद्ध विनाश, विनाश भयावह। मौत का तांडव दुरूह विचार,बेमौत तांडव,निरीह विचारचहुं ओर लोथ संकट संचार,कहे मानव, शक्ति प्रचंड विचार। गोद सूनी आँखें नम सिंदूर मिटा,पूछें, मासूम साया जो छूटाअपनो की माला, मोती टूटा,अमर रहे, … Read more

निर्मल उन्मुक्त बचपन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हरे-भरे मैदान में बच्चे दौड़ लगाते,हँसी की मीठी धुन में सपने झिलमिलाते। नीले गगन तले खुशियों का है मेला,हर नन्हा दिल जैसे रंगों का अलबेला। कोई आगे बढ़ता, कोई पीछे आता,मस्ती की राहों में सब संग मुस्काता। छोटी-छोटी बातें, बड़े-बड़े अरमान,खेल-खेल में सीखें जीवन का सम्मान। हवा संग उड़ते … Read more