रिश्ते… निरे स्वार्थी
बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** उसे लगता था-रिश्ते कृत्रिम हो गए,वास्तविकता नहीं रहीएक-दूसरे से संबंध रखने की,मजबूरी-सी जैसे बन गई। फिर भी उसने सोचा,क्यों ना परख लूं ?रिश्तों की बनावट आज,क्या सभी कहते हैंवो सही है ?या में कहता हूँ वो सही है ? कुछ दिन के लिए,नाटक किया उसनेबीमार होने का,ना गया बहन से मिलनेऔर ना … Read more