रंगों का त्योहार

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** रंजिशें जो थी बरस में,वह मिटाने आ गयाहोली का त्यौहार देखो,रंग लेकर आ गया। बड़ा ही विमोहक ये,भावमय त्योहार हैगृह, नगर और ग्राम बस,उल्लास ही उल्लास है। हर तरफ़ है रंग वर्षा,ढोलकों की थाप हैकुमकुमों की मार से,सुरभित गोरी के गाल हैं। आज दिन रोते हुए को,भी हँसा देते हैं लोगभंग का … Read more

बेचैनी क्यों है इतनी ?

ममता साहूकांकेर (छत्तीसगढ़)************************************* बेचैनी क्यों है इतनी, जब हर समस्या का हल है,आज परेशान हो जितना, उतनी ही खुशियां कल है। सुख दुःख है आनी-जानी, यही सत्य अटल है,चिंताओं में गुम ना होना, मन आवारा बादल है। मत भागो भौतिकता के पीछे हरदम,लुफ्त उठाओ जीवन में हर पल, यही संपत्ति अचल है॥

उसने तोड़ा विश्वास को

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* वह छल पर छल करता आया, उसने तोड़ा विश्वासों को,कश्मीर तो क्या हम पाकिस्तान भी क्यों देंगे गद्दारों को। इस जेहादी नाजायज को, चैन से सोने ना देंगे,लातों का भूत है बातों से मानेगा ना, समझाने से। इसको इसकी भाषा में समझाना हमको आता है,बुझदिल और इस कायर को … Read more

सपनों में उड़ने वालों…

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** सपनों की दुनिया में उड़ने वालों,जरा धरती पर पैर रख कर चलो। माना कि सपनों में सुख है बहुत,मगर थोड़े से दु:ख भी सहते चलो। सुख और दु:ख दोनों ही तो बहनें हैं,इन बहनों पर प्यार लुटाते चलो। धरती पर फूल के साथ काँटें भी हैं उगते,जरा काँटों का भी लुत्फ उठाते … Read more

दर्द सहना होता है

कल्याण सिंह राजपूत ‘केसर’देवास (मध्यप्रदेश)******************************************************* यूँ ही कोई कुंदन नहीं बन जाता है, धधकती आग में गलना होता हैदेवताओं के सिर पर बैठना, कहाँ हर फूल का नसीब होता है। गले का हार बनने के लिए भी हर, फूल को जिगर में घुसी सुई का दर्द सहना होता हैसभी शिखर पर बैठे को देखते हैं, … Read more

कर दो तृप्ति

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* अधरों ने कहा अधरों से,जरा ठहरो ! क्यों तुमने यूँ तड़पाया मुझेअधर कहीं एक होते नहीं,जब तक ना दोनों मिलें। अपने अधर से तुम्हारे अधर,मिल कर पा जाते तृप्तिप्यासे हैं मेरे अधर बहुत,अधरों से छू कर कर दो तुम तृप्ति। तब मैं न रहूं तुम न रहो,रह जाए सिर्फ मेरे तुम्हारेदरम्यान … Read more

चलना धीमी गति से…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ सड़क पर चलना धीमी गति से,तेज रफ़्तार किसी का साथ नहीं देतीजीवन है अनमोल ध्यान दो भाई,सड़क पर रखो नजर, क्योंकि नजर हटी दुघर्टना घटी। सड़क पर चलना धीमी गति से,रास्ता यूँ ही कट जाएगा, मंजिल पर पहुंच जाएगाक्योंकि जीवन है बड़ा अनमोल,इसलिए सड़क पर सर्कस मत करो भाई। सड़क … Read more

संयुक्त परिवार-प्रेम का सागर

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* एक छत एक आँगन,एकसाथ दिलों की धड़कनविश्वास की नींव, प्रेम का सागर,मुस्कुराता है जहां अपनापन। रिश्ते जहां मीठी धुन से,सदा खुले खुशियों के द्वारसुंदर बगिया-सा महकता,सजता है संयुक्त परिवार। दादा-दादी का आशीष,माता-पिता की सच्ची सीखचाचा-चाची का निष्छल स्नेह,संयुक्त परिवार का हैं ये आधार। रिश्तों की डोरी मजबूत,एकता में शक्ति जहां साकारशिक्षा संस्कारों … Read more

शिव मगन होकर नाच रहे

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** शिव जी मगन होकर नाच रहे,भक्तों को शिव पर नाज रहे। गले में पहने साँपों की माला,कानों में बिच्छू कुंडल वाला। और हाथ में डमरू डम-डम बाजे,शिव के तन पर है भस्मी साजे। शिव जी पीकर भंग हुए मतवाला,हलाहल पीकर नीलकंठी वाला। जटा में गंगा कलकल समाए,सिर पर चंदा चक-मक विराजे। हाथ … Read more

रोटी होती अनमोल

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* रोटी होती गोल-मटोल,सबके लिए होती अनमोलखाकर मीठे बोलें बोल,गाएं गीत, बजाएं ढोल। मेहनत करके खाते रोटी,कोई पतली, कोई मोटीरोटी पर तो दुनिया टिकती,तरह-तरह के मोल में बिकती। माँ के हाथों की रोटी का,स्वाद निराला होता हैअन्नपूर्णा बन घर में बसती,पूजा का फल मिलता है। दूर देश हो या विदेश … Read more