तेरी जुल्फें
संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* तेरी जुल्फों आसपास ही सिमटे हैं मेरे एहसास सारे,बड़ा सुकून मिलता है प्रिया, जब वे लहराते घनियारे।उनके लहराने से मिट जाते हैं मन के सारे अंधियारे,लगता है कि उमड़ते तूफानों में मिल गए हैं किनारे। जब तुम झुका लेती हो जुल्फें अँधियारा-सा छा जाता है,तुम्हारी जुल्फों के बस उठाने से मौसम … Read more