आओ प्रियवर
ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** भांति-भांति कुसुम आगवानी,पथ बिछाये तुम्हारे हैं।जूही गुलाब कली कुमुदनी,सँग मन भी उतारे है॥आओ प्रियवर देख रहे पथमादक नैन हमारे हैं… मन सितार सप्तसूर नवरस,भरकर मधुरम मृदुल भावरस।अधरो पर लिए स्मित तरकश,मध्यम रश्मि सजाये दिलकश॥तेरे नैनों के दो जुगनू,मेरे नैनन तारे हैं।आओ प्रियवर देख रहे पथ,मादक नैन हमारे हैं… दामन सजा स्नेहिल पंखुड़ीअधखुले … Read more