मेघ करे गड़गड़

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* रचनाशिल्प:अभिनव छंद में बारहमासी, ८/६ की मापनी… गड़गड़-गडगड़, मेघ करे…,झरझर-झरझर नीर झरे। सावन-भादो, तड़पाए,फरफर-फरफर, पवन चले…। क्वाँर कार्तिक, भरमाए,भरभर भरभर, भूमि करे…। अगहनी पूस, शरमाए,कड़कड़ कड़कड़ शीत परे…। माघ फगुनवा मन डोले,सरसर-सरसर, रंग उडे…। आग चैत बैसाख लगे,चटक-चटक कर देह जले…। डरवाए आसाढ़ ज्येष्ठ,टपटप-टपटप, बूंद गिरे…। परिचय-ममता तिवारी का जन्म १ अक्टूबर … Read more

मंगल वत्थु छंद विधान

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प: २२ मात्रा, प्रति चरण ११ वीं मात्रा पर यति हो, यति के दोनों ओर त्रिकल, चरणांत में गुरु अनिवार्य।… मीत हवा ये नीर, शुद्ध हो विमल सभी।पेड़ लगायें मेघ, बुलाएँ सँभल अभी।धरा सुरक्षा नीर, सुरक्षा मदद करो।पर्यावरणन सखे, सुरक्षण, सनद करो।.धूम्र परत ओजोन, विनाशे कवच बड़ा।उत्तर प्रहरी महा, हिमालय अटल खड़ा।गंगा यमुना … Read more

पद्मावती छंद विधान

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प:३२ मात्रा, प्रति चरण ४ चरण, २-२ समतुकांत हो, १०, १८, ३२ वीं मात्रा पर यति हो।चरणांत गुरु गुरु २२ अनिवार्य जय जय हे भारत, हर जन आरत,अमर रहे भव यश गाथा।जन गण मन गाएँ, ध्वज फहराएँ,उन्नत हो हिमगिरि माथा। नर कर्म शील हो, विनय शील हो,शिक्षित हो हर नर नारी।पालन मर्यादा, हर … Read more

रथोद्धता छंद विधान

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प:११ वर्ण, प्रति चरण ४ चरण, २-२ समतुकांत हो।रगण नगण रगण लघु गुरु २१२ १११ २१२ १ २ वीर पीर हर भूमि नीर की।पेड़ जंतु खग ताल तीर की।मेघ आज नभ चाल काल है।देख अंत फिर मंद हाल है। चेत धीर जन भाव भावना।ले सहेज जल भूमि कामना।मीत मान यह बात आज ले।तो … Read more

यथार्थी छंद विधान 

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प:१८ वर्ण, प्रति चरण ४ चरण, २-२ समतुकांत हो,९, १८ वें वर्ण पर यति अनिवार्य मगण मगण सगण, भगण भगण मगण २२२ २२२ ११२, २११ २११ २२२ जो पाए वे खोए जग में, जीवन एक पहेली है।झूठे नाते-रिश्ते अपने, संगति मृत्यु सहेली है।जन्मे तू तू मैं मैं जपना, मानव मानस आते ही।तेरा-मेरा जाना … Read more

मालती छंद विधान

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प:६ वर्ण, प्रति चरण ४ चरण, २-२ सम तुकांत हो जगण जगण १२१ १२१… उठो रण धीर।चलो सब वीर।करें बलिदान।निभे अरमान। करे रिपु घात।सहे रज मात।चले अभियान।मिटे अभिमान। पिता सुत मात।सखे सुन तात।बचे यह देश।रहे शुभ वेश। परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा है। आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) है। … Read more

मेरे साँवरिया सरकार

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************** लगा रहता उसी में दिल किया जादू कि टोना है।बहुत प्यारा अनोखा मुख बदन श्यामल सलोना है। न मानूँ मैं किसी की बात को, मत रोकना मुझको,मेरा वो साँवरा, मीरा मुझे हर बार होना है। लिए छवि नैन में उसकी, उसी के पास में बैठे,नहीं दिखते किसी को हम, हृदय में एक … Read more

राजहंसी छंद विधान

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प:११ वर्ण, प्रति चरण, ४ चरण, दो-दो समतुकांत, नगण रगण रगण लघु गुरु १११ २१२ २१२ १ २ जगत शांति के गीत गाइए।मनुज मानवी प्रीत पाइए।मन विकार को दूर कीजिए।यश विवेक से मीत जीतिए। सरल जीवनी मित्र चाहिए।विनत कीजिए मेल आइए।प्रकृति ईश के छंद वंदना।अवनि सृष्टि के गीत सर्जना। नमन भूमि को नित्य … Read more

हरी-भरी हो ये धरती

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प-८+८+६=२२ चरणांत-१ १ २) सब ‘धरा’ रह जाएगा (पर्यावरण दिवस विशेष)… वृक्ष लगाओ, हरी-भरी हो, ये धरती।नीर बचाओ, नदियाँ सब, जल भरती॥चिड़िया बोले, डाली डाली, पिक चहके।लदे हुए हों, वृक्ष फूल-फल, से लहके॥ होय प्रकृति भी, मुक्त प्रदूषण, पवन बहे।उड़े खग यूथ, नील गगन पर, मुक्त रहे॥प्रकृति सौंदर्य, सबके मन आकृष्ट … Read more

संत सुंदरदास

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** सुन्दर छंद विधान, रचनाशिल्प-८ वर्ण, प्रति चरण ४ चरण, २-२ समतुकांत हो, मगण भगण गुरु लघु २२२ २११ २ १/.. दौसा के सुन्दर दास।दादू के भक्त सुभास।माने साहित्य प्रवीर।ज्ञानी आदित्य सुधीर। दौसा के वैष्य कुलीन।दादू के शिष्य प्रवीन।काशी में भी कर वास।सीखे साहित्य सुवास। दादू पंथी जग मान।ज्ञानी थे भानु समान।देखे लेखे मन … Read more