यथार्थी छंद विधान
बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प:१८ वर्ण, प्रति चरण ४ चरण, २-२ समतुकांत हो,९, १८ वें वर्ण पर यति अनिवार्य मगण मगण सगण, भगण भगण मगण २२२ २२२ ११२, २११ २११ २२२ जो पाए वे खोए जग में, जीवन एक पहेली है।झूठे नाते-रिश्ते अपने, संगति मृत्यु सहेली है।जन्मे तू तू मैं मैं जपना, मानव मानस आते ही।तेरा-मेरा जाना … Read more