कनक मंजरी छंद विधान
बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प:२३ वर्ण, ४ लघु (१) + ६ भगण (२११) + गुरु ११११+२११ +२११+२११, २११+२११+२११+२, ४ चरण, २-२ समतुकांत रघुवर सोच करे मन में जबलक्ष्मण के तन घाव लगा।वन-वन में भटके प्रिय लक्ष्मणकष्ट सहे तन भाव जगा।अब रण में तुम मूर्छित हो तबकौन रहा मम साथ सगा।हनुमत बोल पड़े तब हे प्रभुलाउँ सजीवन नाथ … Read more