जीना दूभर आज
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* मँहगाई की मार से, मरता अब इंसान।मँहगाई-आतंक है, नहीं कोय अंजान॥ मँहगाई ने कर दिया, जीना दूभर आज।छाती पर चढ़कर करे, मँहगाई अब राज॥ कमा-कमाकर पिस रहे, देखो हम सब लोग।पर मँहगाई बन गई, एक ज़ख्म,इक रोग॥ मँहगाई ज़ालिम बनी, खींच रही है खाल।जीना दूभर हो गया, बहुत बुरा है … Read more