फैल रही है ज्योति

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** खुशियाँ झोली में लिये,आया यह त्यौहार।गृह गलियाँ चमकत रहे,कूड़े सब भंगार॥ दीपक की लड़ियाँ लगी,फैल रही है ज्योति।रंग सजी मनभावना,रंगोली हर ढ्योति॥ आतिशबाजी हो रहे,सजी पँक्तिमय दीप।दूर रहे रक्षित रहे,ना जा अग्नि समीप॥ पूजे प्रथम गजानना,दाएँ शोभे ऋद्धि।गण गणेश देवी प्रिया,बाएँ बैठी सिद्धि॥ ऋद्धि-सिद्धि के पुत्र हैं,और शुभोशुभ लाभ।कमला रानी प्रिय लगे,कमल … Read more

तुलसी है वरदान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* वृंदा तुलसी रूप में,है सचमुच वरदान।जिस आँगन तुलसी रहे,घर पाए उत्थान॥ तुलसी है आरोग्य निधि,है औषधि का मान।तुलसी पौधा धार्मिक,पर हर घर की शान॥ वृंदा के तप-तेज को,किया विष्णु ने भंग।वृंदा तुलसी बन हुई,हरि-पूजन में संग॥ तुलसी-पूजन हो जहाँ,वहाँ देव का वास।सुख,खुशियाँ पलते वहाँ,रहे दिव्यता-वास॥ माह कार्तिक कर रहा,पावनता-संचार।तुलसी चौरे … Read more

गोधन की महिमा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************ गोवर्धन पावन दिवस,अन्नकूट हरि भोग।ब्रजनंदन पूजन विनत,प्रीति भक्ति मन योग॥ गोधन की पूजा करें,करें धेनु श्रृंगार।अहंकार देवेंद्र का,कृष्ण किया संहार॥ गोधन की महिमा बड़ी,देख कुपित गोपाल।खायी गोधन की शपथ माँ,पूत यशोदा लाल॥ गौ गोबर की अल्पना,रच गोवर्धननाथ।आँगन पूजन हो विनत,कृपासिंधु हरि साथ॥ बना स्वयं निज हाथ से,माधव छप्पन भोग।पूजा … Read more

जलाएँ दीप हम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ******************************************************** दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष …… दीपों की महफ़िल सजी,चहुँदिक् विजयोल्लास।मुदित सुखी धन शान्ति जग,नवजीवन आभास॥ कौशल लौटी जानकी,पटरानी रघुनाथ।दीपक जगमग चहुँ जले,कर स्वागत सिय साथ॥ लखि वैदेही राम को,सज अयोध्या धाम।आलोकित दीपावलि,अभिरंजित अभिराम॥ दीनबंधु अभिराम मन,अरिमर्दन लंकेश।पाप घृणा मद खल जले,अवधराज हर क्लेश॥ अभिनंदन सीता वधू,लखन लाल सौमित्र।सजी थाल … Read more

है सुहाग बहुत बड़ा वरदान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* हर नारी नित माँगती,कायम रहे सुहाग।युगों-युगों पलता रहे,जीवन में अनुराग॥ नारी करवा पूजकर,माँगे यह वरदान।हे! माता देना सदा,पति को जीवनदान॥ नारी की खुशियाँ तभी,जब तक संग सुहाग।बिन सुहाग फुफकारता,तन्हाई का नाग॥ काया का सौंदर्य भी,चाहे सदा सुहाग।वरना हर श्रृंगार तो,हो जाते बेराग॥ सचमुच में अभिशाप है,नारी,बिन सिंदूर।हो जाता उल्लास तब,नारी … Read more

शिक्षा हो सब जन सुलभ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************ संविधान शिक्षा प्रजा,मिला मूल अधिकार।आलोकित शिक्षा मनुज,न्याय त्याग आचार॥ शिक्षा मिले समाज में,संस्कार परिवार।छल कपटी सत्तापरक,राजनीति गद्दार॥ धर्म जाति शिक्षा निहित,लोकतंत्र है आज।रोजगार भी जातिगत,बस नफ़रत आगाज़॥ दर-दर ठोकर खा रहे,शिक्षित उच्च सुपात्र।आरक्षण की मार से,तरुणाहत है गात्र॥ लोकतंत्र हो तब सफल,मिटे जाति अरु धर्म।सम्मानित शिक्षित गुणी,अभिनंदित हो कर्म॥ … Read more

रीति-प्रीति अनुपम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *************************************** करवा चौथ विशेष…. रीति-प्रीति अनुपम प्रथा,करवा का उपवास।आज हुआ प्रियतम सफल,प्रिया प्रेम अहसास॥ शतंजीव सारोग्य हो,कीर्ति जगत प्रख्यात।सात जन्म का साजना,प्रीत मिलन सौगात॥ सज़ा थाल कुमकुम फलक,दीप जला ले हाथ।लाल वसन सज आभरण,नवयौवन का साथ॥ रचा हाथ में मेंहदी,बाजुबन्ध सज बाँह।माँग सजा सिन्दूर से,चिर सुहाग मन चाह॥ चारु चरण … Read more

उठा सुदर्शन चक्र फिर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************** यायावर समझो सरित,तीर जलधि हो दूर।प्रवहमान सत कर्मपथ,कभी न हो मज़बूर॥ पारस मणि है आत्मबल,पाञ्चजन्य है धीर।साहस है रक्षा कवच,जीवन रण गंभीर॥ शरशय्या पर लक्ष्यपथ,शोणित रंजित राह।भीष्म बनो तुम त्याग सच,जीए जब तक चाह॥ फॅंसा चक्र के व्यूह में,महारथी फिर एक।लूट घूस कायर छली,आतंकी बन नेक॥ कवि निकुंज शोकार्त … Read more

फैला दो माँ फिर उजियार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ***************************************** नवरात्र विशेष….. दुर्गा माँ तुम आ गईं,हरने को हर पाप।संभव सब कुछ आपको,तेरा अतुलित ताप॥ बढ़ता ही अब जा रहा,जग में नित अँधियार।फैला दो माँ वेग से,तुम अब फिर उजियार॥ भटका है हर आदमी,बना हुआ हैवान।हे माँ! दे दो तो ज़रा,तुम विवेक का मान॥ सद्चिंतन तजकर हुआ,मानव गरिमाहीन।दुर्गा माँ दुर्गुण … Read more

मार्ग अहिंसा विजय पथ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************** सत्य-अहिंसा नीति रथ,आज़ादी की क्रान्ति।बुद्ध जैन गाँधी तिलक,कोटि-कोटि पथ शान्ति॥ शील त्याग गुण कर्म का,मानक था जो लोक।सत्य-अहिंसा सारथी,गाँधी थे आलोक॥ सत्य-अहिंसा प्रीत बिन,भौतिक नित संसार।हिंस्र भाव मिथ्या छली,विश्व मनुज आचार॥ दया धर्म करुणा हृदय,सदाचार तप स्नेह।पथिक अहिंसा बुद्ध बन,मुक्ति सुखी जग धेय॥ समरथ को नहि दोष है,पातक को … Read more