कलम बने हथियार
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* आग उगलती लेखनी,ही लाती परिणाम।जो बदले युग को सदा,लाये नव आयाम॥ लेखन में जब सत्य हो,परिवर्तन का भाव।वही लेखनी पूज्य है,जिसमें जनहित-ताव॥ गाये जो बस दर्द,ग़म,पीड़ाओं के गीत।बने झोंपड़ी,भूख की,जो सच्ची मनमीत॥ वही लेखनी धन्य है,जो असत्य से दूर।जो रखती संवेदना,वही कलम मशहूर॥ कलम बिके ना,दृढ़ रहे,हों कैसे हालात।तभी बनेगी … Read more