हिन्दी हितकर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************** हिन्दी हितकर है सदा,हिन्दी है अभियान।हिन्दी में तो आन है,हिन्दी में है शान॥ हिन्दी सदा विशिष्ट है,हिन्दी है उत्कृष्ट।हिन्दी अपनाएँ सभी,होकर के आकृष्ट॥ कला और साहित्य है,पूर्ण करे अरमान।हिन्दी में है उच्चता, ‘शरद’ सभी लें मान॥ हिन्दी का उत्थान हो,हिंदी मंगलगान।हिन्दी का सम्मान हो,हिन्दी का गुणगान॥ हिन्दी तो समृध्द है,हिन्दी … Read more

पैसों की बेबसी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************************** पैसों का नित जंग है,पैसा ही नवरंग।रिश्ते-नाते मान यश,बिन पैसे बदरंग॥ पैसे ही ऊँचाइयाँ,पैसा ही सम्मान।पैसों के महफ़िल सजे,पैसा ही भगवान॥ पैसों पर शिक्षा टिकी,पैसों पर रोज़गार।हो समाज में हैसियत,रिश्तों का आधार॥ नीचे से संसद तलक,बस पैसों का खेल।आजीवन हर काम में,पैसों का गठमेल॥ रोज-रोज का झूठ छल,राग-द्वेष अपमान।बस … Read more

महादेवी

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** छायावादी काल में,हुए चार कवि स्तंभ।महा महादेवी हुई,एक प्रमुख थी खंभ॥ सन उन्नीस सौ सात में,माह मार्च छब्बीस।जन्म फर्रुखाबाद में,फलित कृपा जगदीश॥ इन्हें आधुनिक काल की,मीरा कह उपनाम।करे प्रशंसा लोग सब,किए काव्य हितकाम॥ कहे निराला जी बहिन,सरस्वती नव नाम।भाई सम रखती उन्हें,विपदा में कर थाम॥ उपन्यास लिखती कभी,कथा कहानी गीत।नारायण वर्मा सुजन,पति साथी … Read more

संभव

डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’रायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************* सब संभव संसार में,बदले जन हैं वेश।अपने मतलब के लिए,शोषित करते देश॥ संभावित परिणाम से,हुआ हृदय बेचैन।विफल भाव आभास से,आँसू बरसे नैन॥ मन छोटा करना नहीं,है संभव सब काज।नियमित कर अभ्यास तू,मिले सफलता आज॥ नेकी करने जो चला,वही बना अनजान।कलियुग में संभव कहाँ,माने जन अहसान॥ नित्य बड़ो का मान रख,कर संभव … Read more

शिक्षक भाग्य विधाता

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* शिक्षक के सम्मान में,आओ आगे वीर।भाग्य विधाता है यही,धीर बनो गम्भीर॥ शिक्षा से उजियार है,लोक और परलोक।शिक्षा बिन उन्नति नहीं,क्यों करता है शोक॥ ज्ञान और विज्ञान से,आलोकित संसार।मत करना हे साथियों,शिक्षा का व्यापार॥ बिन गुरु के सम्भव नहीं,उन्नति और विकास।शिक्षक से शिक्षा मिले,काम सकल विश्वास॥ पहिली गुरु माँ बाप है,शिक्षक … Read more

जय श्री राधेकृष्णा शरणम

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** हलचल मथुरा में मची,जाने क्या हो आज।कलरव कोलाहल रचा कंस सजे क्यों साज॥ सृजन देवकी पीर में,ईश्वर रख लो लाज।लाल बचा वसुदेव का,क्यों इतने नाराज॥ सात पूत की माँ बनी,उजड़ी मेरी कोख।पूत बचा है शुभ घड़ी,ना हो अब ये दोख॥ मेघ फटा क्रंदन हुआ,वर्षा मूसलाधार।कड़ी खुली फिर जेल की,सोये पहरेदार॥ सरवर फूटा धैर्य … Read more

युगावतारी

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************** जन्माष्टमी विशेष…. मात मानकर देवकी,जन्मे युगावतार।बढ़े जुल्म जब कंस के,तोड़े कारागार॥ टूट गयीं सब बेड़ियां,खुले जेल के द्वार।लिया जन्म भगवान ने,करे कंस संहार॥ बंदीगृह खुलते गये,आन पड़े भगवान।द्वापर युग तब सज गया,मिला सत्य को मान॥ पुत्र बने थे कृष्ण जी,दो माता के लाल।जन्म दायनी देवकी,रही यशोदा पाल॥ कंस राज … Read more

भज रे मन श्रीकृष्ण को

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ***************************************** जन्माष्टमी विशेष…… नारायण कारा जनम,लिया कंस संहार।असुर कर्म आतंक से,मुक्त किया संसार॥ नारायण अनुराग मन,पूत देवकी गेह।भाद्र मास तिथि अष्टमी,वासुदेव नर देह॥ कृष्ण अमावश कालिमा,जात कृष्ण अभिराम।कालिन्दी दे सुगम पथ,नंदलाल सुखधाम॥ लीलाधर षोडश कला,वासुदेव रच रास।मिल राधा अठखेलियाँ,कर नटवर उल्लास॥ पीताम्बर घन श्याम तनु,मोरमुकुट नित भाल।सुन्दरतम आनंदकर,यशुमति के गोपाल॥ … Read more

कृष्ण-लीला

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************** धर्म,नीति का सार थे,राधा के गोपाल।उनके कारण धन्य है,द्वापर का वह काल॥ बचपन से करते रहे,लीलाएँ घनश्याम।नहीं हुई तब ही कभी,सत्य,न्याय की शाम नटनागर का रूप है,सचमुच में कुछ ख़ास।बचपन से देते रहे,सबको वे आभास॥ माखन खाकर बन गए,गिरिधर तो ख़ुद चोर।यह लीला रोचक रही,नाचा मन का मोर॥ पराभूत कर … Read more

राखी के रंग

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ************************************************** रक्षाबंधन विशेष………. धागा हर्षाने लगा,होकर के मजबूत।भाई के कर में बँधा,बहना है अभिभूत॥ खुशियाँ नाचीं आँगना,चहके मंगलगीत।हर घर में निभती दिखी,बहुत पुरानी रीत॥ राखी की फैली महक,अहसासों से प्यार।भाई है परदेश में,खुशबू सीमा पार॥ हरकारा लगता भला,लाएगा संदेश।राखी,रोली,आरती,हरने लगे कलेश॥ जीवन अब गतिशील है,लगे खुशी को पाँव।एक बार फिर से … Read more