विज्ञान ने बिखराए नव रंग

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************** ख़ूब रचा विज्ञान ने,सुविधा का संसार।जीवन में सुख भर गया,दिखता जीवन-सार॥ आना-जाना,परिवहन,लेन-देन,संचार।नए सभी कुछ हो गए,शिक्षा अरु व्यापार॥ दूर बैठ संवाद हो,चित्र,वीडियो संग।सचमुच में विज्ञान ने,बिखराये नव रंग॥ जीवन हरसाने लगा,विज्ञानी सौगात।पर यंत्रों से हो गए,मानव के जज़्बात॥ लाइव टेलीकास्ट है,एसी,फ्रिज,जलयान।वायुयान,बिजली सुखद,मोबाइल की शान॥ पर इंसां आराममय,श्रम से है वह … Read more

समरसता मुस्कान जग

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************ आज फँसा मँझधार में,सत्य मीत अरु प्रीत।लोभ अनल में जल रहा,समरसता संगीत॥ मिशन था अंबेडकर,समरसता संदेश।समता ही स्वाधीनता,दलित हरित उपवेश॥ तार-तार अनुबन्ध अब,क्षत-विक्षत ईमान।नश्वर इस संसार में,बिकता है इन्सान॥ मातु पिता भाई समा,शिक्षक मीत जहान।सदाचार परहित विनत,समरसता वरदान॥ भौतिक सुख चाहत बला,है विनाश तूफान।नीति प्रीति यश त्याग सब,भूले बन … Read more

गुरु-वंदना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) **************************************** गुरु पूर्णिमा विशेष………. गुरुवर तुम तो ज्ञान हो,हो सूरज का रूप।शिष्यों को तुम दे रहे,सदा सुनहरी धूप॥ गुरुवर तुमने सीख दे,बाँटा बहुत विवेक।तुम तो गुरुवर तेज हो,तुम हो हरदम नेक॥ गुरुवर मैं अज्ञानमय,खोया था अँधियार।तुमने ही निज ज्ञान से,जीवन दिया सँवार॥ सत्य,न्याय जाना नहीं,ना नैतिकता-भाव।पर अब गुरुवर है नहीं,मुझको कोय … Read more

गुरु करते ज्ञान प्रदीप

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)***************************************** गुरु पूर्णिमा विशेष…… जीवन को सुरभित करें,उर में भरे प्रमोद।प्रलय और निर्माण द्वय,बसते गुरु की गोद॥ ज्यों माटी को गूँथ कर,देता रुप कुम्हार।वैसे ही निज शिष्य को,देता गुरु आकार॥ पथ अवलोकित कर सके,जले स्वयं बन दीप।हृदय तिमिर गुरु मेटते,करते ज्ञान प्रदीप॥ शिक्षक ईश्वर के सदृश,करें सदा उपकार।उसने ही हमको दिया,जीवन का … Read more

माँ भारती…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** धन्य-धन्य माँ भारती,कैसे करूँ बखान।जगती को बाँटी सदा,उपकारों की खान॥ जन-जन जीवन एक है,ऐक लहू का रंग।धरती ही परिवार है,सदा बताती गंग॥ माँ सबका पोषण करे,सदा दिखाती राह।खोजे से मिलती नहीं,उपकारों की थाह॥ गंधसार,रज भूमि की,मलयज की है वात।निर्जर भी आकर यहाँ,धारें मनु की गात॥ सुधामई माँ भारती,जीवन का है सार।उपकारों का … Read more

कठिनाई

डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’रायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************* कठिनाई के बाद भी,जो रण लेते जीत।सर्व खुशी उनको मिले,सबके बनते मीत॥ आती-जाती मुश्किलें,करे तुम्हें तैयार।घबराना मत तू कभी,जीत मिले या हार॥ कठिन परिश्रम कर चलें,आए जीवन काम।ध्येय लक्ष्यता को धरें,संचित कर्म तमाम॥ कठिन परीक्षा की घड़ी,देखो आई आज।लड़ने को तैयार हूँ,मुझे स्वयं पर नाज॥ जो करता है सामना,कठिन समय के … Read more

मानसून शुभ आगमन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************** छाया नभ घनघोर घन,दग्ध धरा बिन आप।मानसून आग़ाज़ लखि,मिटे कृषक अभिशाप॥ मानसून की ताक में,आशान्वित निशि रैन।उमड़ रही काली घटा,कृषक चमकते नैन॥ आया सावन मास फिर,बिजुली गरजे व्योम।बूंद-बूंद बरसे घटा,भींगे तन-मन रोम॥ सूर्यातप तनु स्वेद जल,बहता बीच पनार।मानसून शुभ आगमन,जन-मन खुशी बहार॥ सूखे तरु वन खेत सब,पोखर नदियाँ कूप।मानसून … Read more

मीरा की भक्ति

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************** थी दीवानी श्याम की,मीरा जिसका नाम।जो युग-युग को बन गई,हियकर अरु अभिराम॥ पिया हलाहल,पर अमर,पाया इक वरदान।श्रद्धा से तो मिल गई,जीवन को नव आन॥ लोक लाज को तज हुई,मीरा भक्तिन रूप।खिली हृदय पावन-मधुर,मीठी-मोहक धूप॥ मीरा खोई श्याम में,श्याम बने मनमीत।नहीं हरा पाया उसे,मीरा पाई जीत॥ इकतारा लेकर सजी,मीरा मंदिर ख़ूब।नाची,गाई,मस्त … Read more

पत्ता

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** पत्ता-पत्ता झूमकर,धरती दे अनुराग।पावस सम खुशियाँ कहाँ,है हरियाली जाग॥ छेड़े रागनियाँ पवन,पत्ते करते नाच।तरुवर डोले डालियाँ,लगे बूंद जल काँच॥ झुलसे पादप ग्रीष्म से,पतझड़ पात विहीन।आगम वर्षा जी उठे,पौधे उगे महीन॥ कोमल पल्लव काँपते,खग पश पीपल ठाँव।शीतल कोटर घोंसले,करते कलरव छाँव॥ कोमल मिट्टी स्नेह से,पाले पोषय पेड़।जीवन वृक्ष हरस उठे,हो बरखा मुठभेड़॥ पात-पात पर … Read more

देशप्रेम हो चित्त

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************ समरसता के रंग में,सराबोर परिवेश।अनेकता में एकता,दे भारत संदेश॥ जाति-धर्म आधार ही,हर चुनाव आचार।ऊँचे से नीचे तलक,लोकतंत्र लाचार॥ कवि ‘निकुंज’ जीवन सफल,जन्मा भारत देश।सहयोगी मानस बनें,देशभक्ति परिवेश॥ भाईचारा वतन हो,प्रगति प्रीति सम्मान।अपनापन परहित अमन,समरस यश अरमान॥ तज आलस संकल्प लो,कर मिहनत से प्यार।मिटे निराशा जिंदगी,नव आशा संचार॥ त्याग शील … Read more