सुन लो हे बृजराज

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)********************************** गैया आगे श्याम जी,हलधर भी है साथ।पीछे सब हैं ग्वालिनें,लिए हाथ में हाथ॥ कही राधिका श्याम से,तू तो है चितचोर।चित्त चुरा कर ले गया,नटखट नंदकिशोर॥ माधव बिन सूना लगे,ये सारा ब्रजधाम।सोच रही है राधिका,कब आएँगे श्याम॥ हे प्रभु दीनदयाल तू,रखना मेरी लाज।करूँ वंदना आपकी,सुन लो हे बृजराज॥ गुरु आज्ञा वन … Read more

बिन काम नहीं नाम

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** जीवन जीने के लिए,करना होता काम।काम बिना कछु होत ना,बिना काम नहिँ नाम॥ काम किये से सुख मिलै,और काम व्यवहार।पूछ नहीं बेकार की,नहिँ जीवन में सार॥ काम किये जीवन सुखी,सारी सुविधा पाय।शौक-मौज सारी मिले,खुशियां खिल-खिल जाय॥ जाने सारे काम से,होय काम से नाम।कर्मठ करता है सदा,करो बिना विश्राम॥ अच्छा कारज कीजिये,सदा … Read more

निर्धन

डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’रायपुर(छत्तीसगढ़)******************************************* जग से निर्धनता मिटे,सुखी बने संसार।विनय करूँ मैं ईश से,अन्न करे बौछार॥ दीन-हीन पर कर दया,करो अन्न का दान।भूखे को भोजन मिले,कर लो धर्म सुजान॥ निर्धन मानव देखकर,अपने मुँह मत मोड़।सभी ईश संतान हैं,नजर फेरना छोड़॥ भरण करे परिवार का,फर्ज निभाये दीन।कठिन परिश्रम नित करे,हृदय रखे न मलीन॥ जान दीन दयनीय … Read more

कृष्ण प्रेम

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)***************************************** कृष्ण प्रेम अनुरागिनी,किये जहर का पान।मीरा दीवानी बनी,रखे हृदय भगवान॥ विष का प्याला पी गई,कृष्ण नाम स्वीकार।मीरा व्याकुल प्रेम में,छोड़ चली घर द्वार॥ साधु संत के साथ में,हरि दर्शन की प्यास।मीरा बैरागन भयी,कृष्ण मिलन की आस॥ कालिंदी तट पर खड़ी,देखे राह निहार।मोहन मेरे साँवरे,ब्रज के राजकुमार॥ वंशीधर मनमोहना,तुझे पुकारूँ आज।बिलख … Read more

बादल

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) ************************************ काले बादल छा गये,नभ में चारों ओर।घूम रहे पक्षी सभी,बच्चें करते शोर॥ शीतल चलती है हवा,तन-मन भी मुस्काय।बूँद-बूँद बरसे जमीं,मन हर्षित हो जाय॥ सुंदर दिखते बाग हैं,लहराते हैं फूल।बारिश बूँदें देख कर,पत्ते जाते झूल॥ छायी सावन की घटा,आयी है बरसात।सोचे मानव देख कर,कैसे बीते रात॥ सूखे सूखे वृक्ष के,मन … Read more

आत्म मनुज सौन्दर्य ही जीवन उपहार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *************************************** बने सेतु ख़ुशियाँ मनुज,करें प्रकृति सुखसार।खिले सुमन सुरभित वतन,रोपण तरु उपहार॥ आत्म मनुज सौन्दर्य ही,जीवन का उपहार।सुरभि हीन किंशूक कुसुम,बाह्य रूप सुखसार॥ दो दिल का अनुपम मिलन,रचना नव संसार।सुख-दु:ख गम खुशियाँ सकल,है विवाह उपहार॥ सुन्दर तन-बन गुलवदन,सज षोडश श्रंगार।चपला नटखट चातुरी,प्रिय पायल उपहार॥ छह ऋतुओं में प्रकृति सज,विविध रूप … Read more

हमारी संस्कृति

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ***************************************** भारत नित ही विश्वगुरू है,देता सबको ज्ञान।संस्कार भारत के पाते,सबसे ही सम्मान॥ नीति और नैतिकता मोहक,हम सबसे सुंदर,पश्चिम से भारत के बेहतर,कला और विज्ञान। मानवता को हमने जाना,हिंसा को त्यागा,करुणा,दया,सत्य,मर्यादा,सद्कर्मों की आन। पूजा हमने चाल-चलन को,जीना सिखलाया,देह नहीं है रूह की भाषा,नैतिकता का मान। तीज और त्यौहारों से तो,चोखा बना … Read more

सुन लो हे गोपाल

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************** सुन लो हे गोपाल अब,विनती बारम्बार।भवसागर नैया फँसी,आज लगाना पार॥ मनमोहन हे साँवरे,कृपा सिंधु भगवान।आये तेरे द्वार पर,दीन-हीन इंसान॥ मोर पंख मस्तक मुकुट,वैजन्ती गल माल।पीताम्बर काँधा धरे,मुख मुरली गोपाल॥ दधि माखन मुख पर लगे,दौड़े आँगन द्वार।बाल रूप मनमोहना,मोहित सब संसार॥ झुला रही है पालना,माता यशुमति श्याम।साथ रोहिणी की तनय,झूल रहा … Read more

सौहार्द-मानव जीवन का अमृत

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. जीवन में सौहार्द हो,तो आता मधुमास।अपनाकर सौहार्द को,मानव बनता ख़ास॥ नित सुहृदित आचार में,है करुणा का रूप।जिससे खिलती चाँदनी,बिखरे उजली धूप॥ सुविचारों से ही सदा,मानव बने उदार।द्वेष,कपट सब दूर हों,तो जीवन जयकार॥ अंतर्मन में नम्रता,अधरों पर मृदु बोल।करता है सौहार्द तो,जीवन को अनमोल॥ रीति,नीति हमसे … Read more

घर-आँगन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *************************************** घर-आँगन सुन्दर सजे,मिल-जुल नित सहयोग।त्याग शील पौरुष सुभग,नीति प्रीति बिन रोग॥ खिले कुसुम घर प्रगति के,आँगन भारत देश।सुखद शान्ति सद्भावना,मानवीय परिवेश॥ आँगन तुलसी पूजिता,उपयोगी शुभकाम।तन धन मन सुख सम्पदा,अन्त काल अविराम॥ श्री शोभा तनया सुता,पिता मान पर गेह।करुणा ममता शुचि खुशी,यशो निधि बस नेह॥ घर शोभे नित अंगना,मातु वधू … Read more