प्रकृति का पुजारी है वसंत उत्सव

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** ज़िंदगी एक वसंत… (वसंत पंचमी विशेष)… ‘वसंत पंचमी’ जो अबूझ मुहूर्त माना जाता है, विवाह आदि मांगलिक कार्य तथा नवीन प्रतिष्ठान के लिए श्रेष्ठ दिन होता है। ऋतुराज वसंत के आने पर वृक्षों की पत्तियाँ अभिवादन के लिए जमीन पर बिछ जाती हैं। टेसू के फूल खिलने लगते हैं। आमों के … Read more

सचेत होकर बचेंगे मानवीय मूल्य

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** मानवीय मूल्यों से नाता तोड़ कर जिस नव संस्कृति से हम इठला रहे हैं, वह हमारी अस्मिता को ही समाप्त करती जा रही है। हमें अपनी संस्कृति को बचाने के लिए सचेत होने की ज़रूरत है।अनुशासन और मर्यादा का एवं हमारी संस्कृति और सभ्यता का क्षरण होता जा रहा है। जब समाज … Read more

पाश्चात्य संस्कृति बुझा रही चिराग

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ आधुनिकता का यह दौर ना जाने इन युवा पीढ़ी को कहाँ ले जाएगा। पाश्चात्य संस्कृति का रंग शहरों के युवक-युवतियों पर ऐसा चढ़ा है, कि खुलेआम सिगरेट के गुल-छर्रे उड़ा रहे हैं। शराब की बोतलें पार्टी की संस्कृति बनता जा रही है। जैसे यह अमृत है ? इस आपा-धापी व … Read more

कोलाहल में शांति का शंखनाद है ‘मौन’

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** मौनी अमावस्या (१८ जनवरी) विशेष… ‘मौन’ केवल शब्दों का अभाव नहीं है, वह आत्मा की सबसे सघन भाषा है। १८ जनवरी वाली ‘मौनी अमावस्या’ इसी मौन की महत्ता को जीवन के केंद्र में प्रतिष्ठित करने का पावन, सिद्ध एवं पवित्र अवसर है। भारतीय आध्यात्मिक परम्परा में मौन को जितना ऊँचा स्थान दिया … Read more

नए भारत के लिए बचत और खर्च का असंतुलन बड़ी चुनौती

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** महामारी के बाद की दुनिया केवल स्वास्थ्य के स्तर पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक सोच और व्यवहार में भी एक बड़े संक्रमण से गुज़री है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती महंगाई, तकनीक-आधारित बाजार और उपभोक्तावादी संस्कृति के तीव्र प्रसार ने लोगों की खर्च करने की प्रवृत्ति को असाधारण रूप … Read more

भविष्य की बड़ी उम्मीद हैं हिंदी के बढ़ते कदम

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। ‘हिन्दी दिवस’ और ‘विश्व हिंदी दिवस’ भारतीय दूतावासों और विदेशों में स्थित शैक्षणिक संस्थानों में विशेष रूप से मनाया जाता है, ताकि गैर हिंदी भाषियों को हिंदी भाषा के साथ जोड़ा जा सके। ‘विश्व हिंदी दिवस’ हमें अपनी भाषाई जड़ों पर … Read more

भारत में हिन्दी को स्थान-सम्मान अपेक्षित

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘विश्व हिंदी दिवस (१० जनवरी) विशेष…. हर वर्ष १० जनवरी को मनाया जाने वाला ‘विश्व हिंदी दिवस’ केवल एक औपचारिक या प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हिंदी भाषा की वैश्विक यात्रा, उसकी बढ़ती प्रतिष्ठा, उपस्थित चुनौतियों और हमारे अपने राष्ट्रीय आचरण की विडंबनाओं पर गहन चिंतन का अवसर है। यह दिन … Read more

१९८४ का वो खौफनाक मंजर

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “उफ्फ कितना भयानक मंजर था वह।”“किसकी बात कर रही हो आंटी ?”सुधा एकदम जैसे सपनों से जागी और बोली कि बस उस दिन को याद कर रही हूँ।“किस दिन को ?”“३१ अक्टूबर सन् १९८६ का दिन था बेटा। उसी दिन तेरे अंकल की पदोन्नति हुई थी। इंदिरा गांधी की हत्या कर दी … Read more

नया साल नया उत्साह लाया

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… हर कोई ज़िन्दगी में सफ़र करता है, क्योंकि जीवन की कहानी भी यही है। चलना ही सच की निशानी है। समय-चक्र भी दिन, महीने, साल के बीत गए। नई उमंग, नए विचार नया-नया लगता है यहाँ संसार। “दादा भाई चलते हैं” कहीं … Read more

सुख-शांति के लिए लें संकल्प

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… २०२५ बीत गया…। कैलेण्डर बदल जाता है, साथ में हर दिन कुछ खट्टी-मीठी यादों को देकर जाता है… क्योंकि कालचक्र तो अनवरत् गतिमान रहता है….वर्ष २०२६ का आगमन हो चुका है… नववर्ष अपने साथ बहुत सारी उम्मीदें और सपने लेकर आता है, इसी लिए … Read more