मंदिरों में हो सुशासन का सूत्रपात

ललित गर्गदिल्ली******************************* भारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक दर्शन से नहीं है, बल्कि उन मंदिरों से भी है जो करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और जीवन का आधार हैं। अयोध्या का श्रीराम मंदिर, बद्रीनाथ धाम, माता वैष्णोदेवी, तिरुपति, काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, सालासर बालाजी, खाटू श्यामजी जैसे मंदिर केवल धार्मिक स्थल … Read more

कुत्सित सोच वाले लोग बाधक

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** कुत्सित सोच (संकीर्ण मानसिकता) वाले लोग समाज, रिश्तों और खुद के विकास में सबसे बड़ा बाधक होते हैं। इनकी पहचान, नकारात्मकता और इनसे बचाव के व्यावहारिक उपाय हैं-  कुत्सित सोच वाले लोगों की पहचानदूसरों की टांग खींचना:ये लोग अपनी सफलता पर काम करने के बजाय दूसरों को नीचा दिखाने में ऊर्जा … Read more

अब यादें शेष… जो है विशेष

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )********************************** छोटे से गाँव देहरिया साहू (जिला देवास) में अपनी शिक्षा, संस्कार व समर्पण में कर्मवीर श्रेष्ठ शिक्षक, जो बच्चों के प्रति सजगतापूर्वक ईमानदारी से शासकीय शाला में अपनापन रखते हुए अपना अव्वल दे रहा था, उनका यूँ चले जाना बहुत आश्चर्यजनक है। विद्यार्थियों की योग्यता का बीज पूर्ण रूप से … Read more

हिंद-प्रशांत में भारत का बढ़ता सामर्थ्य

ललित गर्गदिल्ली******************************** भारत आज केवल विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति ही नहीं, बल्कि एक उभरती हुई वैश्विक महाशक्ति के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति ने जिस आत्मविश्वास, स्पष्टता और दूरदृष्टि का परिचय दिया है, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल … Read more

क्या शाकाहारियों को स्वच्छ हवा में साँस लेने का अधिकार नहीं ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** लोकतांत्रिक समाज में प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। यह स्वतंत्रता व्यक्तिगत गरिमा और जीवन-शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, किंतु किसी भी अधिकार की सीमा वहीं तक होती है, जहाँ से दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का हनन प्रारंभ होता है। यदि किसी व्यक्ति की भोजन … Read more

भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर ‘संयुक्त परिवार’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। यह केवल एकसाथ रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, सहयोग, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों का सुदृढ़ आधार है। संयुक्त परिवार में दादा-दादी, माता-पिता, चाचा-चाची, भाई-बहन तथा अन्य सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं। सभी एक-दूसरे के सुख-दुःख में … Read more

एंटीबायोटिक

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** सुमित के गाल में बहुत ज्यादा दर्द था। उनको लग रहा था, शायद दाँत में कोई तकलीफ है। कुछ भी खाया नहीं जा रहा था। गाल पर बुरी तरह सूजन भी आई हुई थी और दर्द इतना कि बर्दाश्त से बाहर था। एक निजी हाॅस्पिटल में दाँत के डॉक्टर को दिखाया। उसने … Read more

मजबूत लोकतंत्र के लिए दागी नेताओं से मुक्ति जरूरी

ललित गर्गदिल्ली********************************* भारतीय लोकतंत्र ने स्वतंत्रता के बाद अनेक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। आज भारत विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति होने के साथ-साथ विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। वर्ष २०४७ तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के साथ देश आर्थिक, तकनीकी और वैश्विक नेतृत्व की नई ऊँचाइयों को … Read more

हमारा कर्तव्य कि चिकित्सकों का सम्मान करें

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)****************************************** धरती के भगवान…. चिकित्सक (डॉक्टर) को ‘धरती का भगवान’ कहा जाता है, क्योंकि भगवान स्वयं हर स्थान पर उपस्थित नहीं हो सकते। इसलिए उन्होंने अपने प्रतिनिधि के रूप में चिकित्सक को धरती पर भेजा है। इसी कारण चिकित्सक को ‘धरती का भगवान’ कहा जाता है। सफेद कोट और गले में स्टेथोस्कोप … Read more

लेखकों का कर्म और धर्म दोनों महत्वपूर्ण

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* लेखकों का कर्म और धर्म दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज की विभिन्न समस्याओं को उजागर करना और उनके उचित समाधान प्रस्तुत करना लेखक का प्रमुख दायित्व होता है। लेखक का प्रथम कार्य सत्य का अन्वेषण करना तथा उसका निष्पक्ष रूप से प्रस्तुतिकरण करना है। उसे समाज में विद्यमान अच्छाइयों और … Read more