‘धन’ को समाज की समृद्धि का माध्यम बनाएं

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** धनतेरस (१८ अक्टूबर) विशेष…. ‘धनतेरस’ का पर्व पंच दिवसीय दीपोत्सव की पवित्र श्रृंखला का आरंभिक द्वार है। यह केवल सोना-चाँदी, वस्त्र या बर्तन खरीदने का शुभ दिन नहीं, बल्कि धन के प्रति हमारी सोच को पुनर्संतुलित करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में धन को सदैव देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया … Read more

मानक और सुरक्षा उपायों की कोताही क्यों ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** २ राज्यों (राजस्थान और मध्यप्रदेश) में कफ सिरप से जुड़ी बच्चों की मौत की घटनाएं देश की दवा नियामक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यह केवल एक चिकित्सा त्रुटि या आकस्मिक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस तंत्र की विफलता का प्रतीक है जिस पर जनता अपने जीवन की रक्षा के लिए … Read more

गड़बड़झाला… ध्यान दो सरदार

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ अब तो पूरे देश में उत्सव की ज्योति प्रकाशमान होने वाली है। त्योहार व पर्व की मस्ती में नए जमाने के सुकून के पल नहीं, भागम-भाग की दौड़ है। इसलिए रेडिमेड का दौर है, सब चीजें बनी- बनाई चहिए सभी को। बुजुर्ग वर यह तमाशा देख कर मुस्काते हैं और … Read more

सीखने की जिद और जोखिम का नाम ‘अमिताभ बच्चन’

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ जन्म दिवस (१२ अक्टूबर) विशेष…. कुछ दिन पहले कहीं पढ़ा था कि अभिनेता अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया, “हर पल जीवन का, कुछ न कुछ सिखाता है, क्षमता कम ना हो सीखने की, समय यही सिखाता है।”हम सभी अपने जीवन में हर पल सीखते रहते हैं, परंतु इस बात को समझने और … Read more

जनता ‘जाति’ नहीं, ‘न्याय’ चुने, तो बिहार रचेगा इतिहास

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** बिहार में चुनावी रणभेरी बज चुकी है। मतदान की तारीखों की घोषणा के साथ ही लोकतंत्र का महायज्ञ आरंभ हो चुका है, जिसमें करोड़ों मतदाता अपने मत से राज्य की दिशा-दशा तय करेंगे। इस बार का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि विचार और व्यवस्था परिवर्तन का चुनाव है। बिहार लंबे … Read more

जीवन की मुस्कान है मानसिक स्वास्थ्य

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ हर वर्ष हमें यह सोचने का अवसर देता है कि मनुष्य का सबसे बड़ा धन उसका मन है, और जब मन अस्वस्थ होता है तो समूचा जीवन बिखर जाता है। यह प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपात स्थितियों के दौरान लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करने … Read more

शरदिया चाँद और नदिया

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* इन दिनों मैं अपने गाँव में हूँ। गाँव की प्रकृति का नजारा बड़ा मनोरम और लुभावन बना हुआ है।धुंआधार बारिश के चलते वसुंधरा मानो जैसी दुल्हन-सी सजी-धजी है। इन दिनों फसलों की कटाई का मौसम चल रहा है, तो विस्तीर्ण फैले खेतों में बाजरे की पकी फसल बड़ी ही मस्ती से … Read more

मानसिक बदलाव का सशक्त माध्यम बने शिक्षा

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** पढ़ाई सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं होना चाहिए। शिक्षक आपस में मिलकर अनुभव साझा करें, नई तकनीकें अपनाएं और मिलकर शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाएं। इस तरह शिक्षक न सिर्फ अपने पेशे में संतुष्ट रहेंगे, बल्कि छात्रों को भी बेहतर शिक्षा मिल सकेगी। संदेश यही है कि शिक्षा को सुधारने … Read more

“क्या तुममें से कोई राम है ?”

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** राम कथा के संदर्भ में विजयादशमी रावण पर राम की विजय का दिन है, जिसे प्रतीकात्मक स्तर पर हम बुराई पर अच्छाई की विजय और अंहकार के नाश के रूप में देखते हैं। इस प्रतीक को प्रत्य़क्ष रूप से दर्शाने का माध्यम है-सालों से चला आ रहा रावण के पुतले का दहन।आज … Read more

गांधी-विचार को कुचलने की कुचेष्टा दुनिया के लिए गंभीर चुनौती

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** लंदन के प्रसिद्ध टैविस्टॉक स्क्वायर में महात्मा गांधी की ५७ साल पुरानी कांस्य की प्रतिमा पर हुआ हमला केवल एक मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने की घटना भर नहीं है, बल्कि यह गांधी के अस्तित्व, विचार और भारत की आत्मा पर आघात है। गांधी प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ करते हुए काले रंग से … Read more