फिल्मी धर्म बनाम आधुनिक पश्चिमी फ़िल्मों का प्रभाव

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* जब देश में धर्म का मौसम बार-बार बदल रहा हो, धर्म पर काले काले बादलों की घटा छाई हुई हो, तो क्या आवश्कता है लोगों द्वारा आपत्ति करने पर, वही गलती को दोहरा कर चिढ़ाया जाए। यह मानसिकता किस श्रेणी में होगी! कहना अति कठिन ही होगा।मंदिरों में पौराणिक काली माँ … Read more

सशक्त विपक्ष बिन लोकतंत्र अधूरा

ललित गर्गदिल्ली ************************************** भारतीय लोकतंत्र के सम्मुख एक ज्वलंत प्रश्न उभर के सामने आया है कि क्या भारतीय राजनीति विपक्ष विहीन हो गई है ? आज विपक्ष इतना कमजोर नजर आ रहा है कि सशक्त या ठोस राजनीतिक विकल्प की संभावनाएं समाप्त प्रायः लग रही हैं। इतना ही नहीं, विपक्ष राजनीति ही नहीं, नीति विहीन … Read more

संसार को भीड़ से बचाने का सूत्र

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* ११ जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया जाता है। ऐसे अवसरों पर लोग उत्सव करते हैं, लेकिन इस विश्व दिवस पर लोग चिंता में पड़ गए हैं। उन्हें चिंता यह है कि दुनिया की आबादी इसी रफ्तार से बढ़ती रही तो अगले ३० साल में दुनिया की कुल आबादी लगभग १० अरब … Read more

श्रीलंका:सबक जरूरी

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)****************************************** यूँ तो आज विश्व के समस्त देशों में कहीं ना कहीं घमासान छिड़ा है। कोई अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने की होड़ में लगा है, तो कोई अपनी आर्थिक शक्ति को सब पर हावी करने पर लगा है। जहां एक ओर चीन और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश अन्य शक्तिशाली देशों को आपसी … Read more

गद्य शैली के प्रमुख विधायक राजा लक्ष्मण सिंह

प्रो. अमरनाथ, कलकत्ता( पश्चिम बंगाल)******************************** हिन्दी योद्धा-पुण्यतिथि विशेष आगरा (उप्र) के वजीरपुरा नामक स्थान में जन्मे, आगरा में पढ़-लिखे राजा लक्ष्मण सिंह (९-१०-१८२६, १४-७-१८९६) को ‘राजा’ की उपाधि भी अंग्रेजों की ओर से ही मिली थी। वे भारतेन्दु-युग पूर्व हिन्दी गद्य शैली के प्रमुख विधायक के रूप में जाने जाते हैं। पढ़ाई के बाद पश्चिमोत्तर … Read more

काश! कुछ ऐसा हो जाए

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* मनुष्य को आस-पास का परिवेश सदैव प्रभावित करता है। किसने किस समुदाय से क्या सीखा, यह अपने स्वभाव पर निर्भर करता है और फिर वह सबके स्वभाव के अनुकूल कैसे हो जाता है ? क्या भाषा इस अनुकूलता में सहायक बनती है या धर्म-जाति के उठे असामयिक विवाद ? भाषा में … Read more

गुरु नहीं, जीवन शुरू नहीं

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** गुरुपूर्णिमा विशेष…. प्रत्येक मानव को ही शिक्षा के लिए शिक्षक की जरुरत होती है। वास्तव में मानव बहुत कमज़ोर प्राणी होता है, बनिस्बत पशुओं के। पशु जन्म के कुछ समय बाद अपने बल पर चलने-फिरने,दौड़ने लगता है। न उसे कोई सिखाता है, वह अपने अनुभव से सीखता जाता है। मनुष्य के जन्म के … Read more

मनमाना चित्रण और धार्मिक उदारता की परीक्षा

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** लगता है ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ की आड़ में विद्रोही तमिल फिल्मकार लीना मणिमेखलई ने हिंदुओं की धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाने की सुपारी ले ली है। हिंदुओं की देवी काली के ‍विवादित और बहुनिंदित पोस्टर के बाद उन्होंने शिव और पार्वती के सिगरेट पीते ट्वीट किए। इस अदा के साथ कि कोई … Read more

चारित्रिक अवमूल्यन:नेतृत्व शक्तियों को सबक

ललित गर्गदिल्ली ************************************** ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की विदाई का कारण स्वच्छन्द, भ्रष्ट एवं अनैतिक राजनीति समूची दुनिया के शासनकर्ताओं को एक सन्देश है इस बेकद्री से बे-आबरु होकर विदा होना। किस तरह कांड-दर-कांड का सिलसिला चला और जॉनसन ने २०१९ के चुनावों में जो राजनीतिक प्रतिष्ठा अर्जित की थी, वह धीरे-धीरे राजनीतिक अहंकार … Read more

मतभेद रखें, लेकिन मनभेद नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* आजकल हमारे टी.वी. चैनलों और कुछ नेताओं को पता नहीं क्या हो गया है ? वे ऐसे विषयों को तूल देने लगे हैं, जो देश की उन्नति और समृद्धि में कोई योगदान नहीं कर सकते। जैसे भाजपा प्रवक्ता द्वारा पैगंबर मोहम्मद के बारे में दिया बयान और अब केनाडा में बनी फिल्म … Read more