राष्ट्रवाद:एक अवलोकन व विवेचना
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* उपरोक्त विचारों से स्पष्ट हो जाता है कि, भारत में राष्ट्रवाद का उदय और विकास उन परिस्थितियों में हुआ जो राष्ट्रवाद के मार्ग में सहायता प्रदान करने के स्थान पर बाधाएँ पैदा करती है। वास्तविकता यह है कि, भारतीय समाज की विभिन्नताओं में मौलिक एकता सदैव विद्यमान रही है और … Read more