पृथ्वी के महत्व को समझें और बच्चों को भी समझाएं

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ पृथ्वी दिवस (२२ अप्रैल) विशेष… हम सबको आने वाली पीढ़ी को पृथ्वी के महत्व को समझाना और बताना आवश्यक है। प्रकृति और पृथ्वी के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए २२ अप्रैल को ‘अर्थ-डे’ मनाया जाता है। हमें इसे एक दिन के स्थान पर परंपरा या आदत की तरह से मनाने की … Read more

विरासत एवं विकास का समन्वय अपेक्षित

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘विश्व विरासत दिवस’ (१८ अप्रैल) विशेष… ‘विश्व धरोहर दिवस’ अथवा ‘विश्व विरासत दिवस’ मानव सभ्यता के इतिहास और विरासत को एक साथ सम्मान देने एवं ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षित करने के लिए हर साल १८ अप्रैल को मनाया जाता है। उद्देश्य सांस्कृतिक परिदृश्यों और संरचनाओं का जश्न मनाना और उन … Read more

नफरती दुनिया ही विनाश का कारण

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अभी समस्त विश्व पटल पर विस्तार वाद, दंगा, हिंसा, घृणा, स्वार्थ विष फैला हुआ है और मानवीय एवं न्यायिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है। काम, क्रोध, लोभ मोह मद, और विषाद रूपी बहुविध रोग से आज दुनिया सदाचार, नैतिकता, संस्कार और अपनी गौरवमयी संस्कृतियों से विरत दानवीय चरित्र … Read more

समाज निर्माण में कला की महती भूमिका

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** यह जीवन एक रंगमंच है। यहाँ हर एक व्यक्ति कलाकार है, जो अपनी अलग-अलग भूमिका अदा करता है। जीवन जीना भी एक कला है। प्रत्येक मनुष्य के भीतर एक कला छिपी होती है। कला मानव जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। यह न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह हमारी … Read more

‘कला’ सशक्त माध्यम है दुनिया को खूबसूरत बनाने का

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘विश्व कला दिवस’ (१५ अप्रैल) विशेष… कला जीवन को रचनात्मक, सृजनात्मक, नवीन और आनंदमय बनाने की साधना है। कला के बिना जीवन का आनंद फीका-अधूरा है। कला केवल एक भौतिक वस्तु नहीं है, जिसे कोई बनाता है; बल्कि यह एक भावना है जो कलाकारों और उन लोगों को खुशी व आनंद देती … Read more

बारिश में तालाब क्यों बनते शहर

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** खाली जगह में निरंतर कमी होने का कारण है कि शहर के आस-पास जो जल निकाय है, उन पर या तो अतिक्रमण हो गया है या उनमें इतनी ज्यादा गाद जमा हो गई है कि जितनी बारिश होती है, उसको समाहित करने के लिए उनमें जगह ही नहीं बचती और वह पानी … Read more

लघुकथाओं का सामाजिक दृष्टिकोण

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** जब ओडिशा के एक कथाकार मित्र ने मुझे यह खुले मन से कहा -“हिन्दी में लघुकथाएँ प्रामाणिक एवं प्रभावी ढंग से लिखी जा रही है। उड़िया भाषा में हिन्दी की लघुकथाओं का अनुवाद हो रहा है, इससे लगता है कि हिन्दी की लघुकथाओं ने बहुत प्रगति की है” तो मुझे भी … Read more

‘साजा’ जैसे त्योहार अमूल्य संस्कृति

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** भारतीय किसान के जीवन का आधार प्रकृति के साथ ही है। उसके सभी त्योहार उत्सव, हर्ष, उल्लास प्रकृति पर निर्भर है। किसान का नाचना-गाना प्रकृति के संग होता है। खेतों के सारे काम बुआई, निराई, गुड़ाई, सिंचाई ‌ मौसम के अनुसार किए जाते हैं। इसी सिलसिले में जब प्रकृति में … Read more

‘साजा’ जैसे त्योहार अमूल्य संस्कृति व धरोहर

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** भारतीय किसान के जीवन का आधार प्रकृति के साथ ही है। उसके सभी त्योहार उत्सव, हर्ष, उल्लास प्रकृति पर निर्भर है। किसान का नाचना-गाना प्रकृति के संग होता है। खेतों के सारे काम बुआई, निराई, गुड़ाई, सिंचाई ‌ मौसम के अनुसार किए जाते हैं। इसी सिलसिले में जब प्रकृति में … Read more

राणा के बहाने पाकिस्तानी मंसूबे बेनकाब करना जरूरी

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** मुम्बई में भीषण एवं दर्दनाक आतंकी हमले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में सक्रिय रूप से शामिल रहने वाले पाकिस्तान मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत लाया जाना किसी उपलब्धि से कम नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कूटनीतिक जीत एवं भारत की कानून … Read more