छोटे नोट और छोटे लोगों से रिश्ता मजबूत रखें

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया-१९… भगवान ने हथेली के आगे अंगुलियाँ इसलिए बनाई है कि पहले आप कर्म करें, फिर भाग्य को महत्व दें। बिना कर्म के आपका अच्छा भाग्य नहीं बन सकता है। इंसान कितना भी गोरा क्यों न हो, परन्तु उसकी परछाई काली ही होती है। ‘मरने के बाद अर्थी … Read more

रुद्राक्ष हो या इंसान… ‘एकमुखी’ बहुत कम मिलते

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया… ‘ईमानदारी’ का महत्व इसी बात से समझ में आता है, कि जो व्यक्ति स्वयं गलत काम करता है, परंतु अपने नौकर से ईमानदारी की अपेक्षा करता है। वफादार सभी कोई चाहते हैं, परन्तु स्वयं कोई बनता नहीं चाहता। “हमारे देश में सरकारी अस्पताल का मतलब है-जान से … Read more

माया मिली ना राम, क्या होगा…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ राजनीति की गलियों में चुनाव के समय सब अपने-अपने स्तर पर गोटी फिट करने में लगे रहते हैं, क्योंकि जहां आस है, वहीं विश्वास भी है। शोर-शराबे की दहलीज को पार कर अमर्यादित टिप्पणी व भाषाओं के तर्पण में ‘मत’ की तलाश में रहते हैं लोग…, क्योंकि शतरंज की राजनीतिक … Read more

सतरंगी दुनिया

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** प्रेशर कुकर कितना भी पुराना हो जाए, वो कभी भी सीटी मारना नहीं छोड़ता है। इसी प्रकार शेर कितना भी बूढ़ा हो जाए, मांस ही खाएगा;कभी घास नहीं खाएगा। सभी अपनी-अपनी आदत से मजबूर हैं। झूठ बोलना भी एक कला है, आजकल बहुत काम आती है। इसमें इंसान अपने … Read more

काश! प्राचार्य होता!

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** काश! मैं किसी कॉलेज का प्राचार्य होता-बस एक डिग्री फ्री रजिस्ट्रेशन भरने की बजाय पावर-पैक खाता हाथ में होता। यह पद केवल ‘शैक्षणिक जिम्मेदारी’ नहीं, बल्कि एक लाइफ-स्टाइल लाइसेंस होता, जो सुबह से शाम तक प्राचार्य स्टाइल में बिताने की अनुमति देता। कॉलेज में क्लास रूम की घंटी छात्रों के लिए … Read more

मैं बिजली विभाग का प्रमुख होता…

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** सरकारी दफ्तरों में जो बिजली सबसे ज्यादा जलती है, वह मीटर से नहीं, ‘कमीशन कनेक्शन’ से जलती है। और अगर बात हो इलेक्ट्रिकल विभाग की, तो समझिए यह विभाग बिजली का नहीं, चालाकियों का हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर है;जहाँ तारों से नहीं, तरकीबों से करंट दौड़ता है। मैं जब किसी खराब बल्ब … Read more

जेब-कतरे परेशान…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** जबसे ऑनलाइन भुगतान आरम्भ हुआ है, तब से आदमी ने तो जेब में पैसे रखना बंद कर दिया है। अब वे जेब में क्रेडिट कार्ड रखते हैं, या मोबाईल से भुगतान करते हैं। इस कारण हमारे समाज का एक जेब-कतरा वर्ग बेरोजगार हो गया है…। इतना खतरा मोलकर जब … Read more

पांडेय जी के हसीन सपने और बदलती दुनिया

लालित्य ललितदिल्ली*********************************** पांडेय जी अचानक से बौद्धिक हुए, जब उनके मन में विचार आया कि हाथी के दांत खाने के और दिखावे के और हुआ करते हैं; उन्होंने यह भी मान लिया कि दुनिया आपसे कहीं ज्यादा और मोल-भाव किए रखती है कि किससे क्या मिल जाए और कहाँ तक मिलने की संभावना है। वे … Read more

जूते की महिमा

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** बचपन में हमें बताया गया था कि जूता पैर में पहनना जरूरी है, क्योंकि जूता पैर की सुरक्षा करता है। कुछ बड़े होने पर जब हम घर में कोई काम नहीं करते थे, या बड़ों का कहना नहीं मानते थे, तब ये आवाज सुनाई देती थी-‘जूते खाने हैं क्या … Read more