बदलते रंग-रामभरोसे के संग

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ इन्दौर मध्यप्रदेश) ********************************************* आज वर्तमान परिवेश में व्यक्ति के जीवन में रंगों की अहमियत बढ़ती ही जा रही है,फिर वह होली के रंग हों,मुस्कानों के रंग हों,या आध्यात्म के रंग,बस रंगों का होना ही जीवन की सार्थकता को सही मुकाम देता है। फिर भी नित्य नए रंग बदलती इस बहुरंगी दुनिया में … Read more

बुरा न मानो भाई होली है

वाणी बरठाकुर ‘विभा’ तेजपुर(असम) ************************************************************* बुरा न मानो भाई होली है, ये तो मस्तानों की टोली है। हम भी कुछ लेकर आए हैं झोली में, अरे भाइयों पहले रंग न लगाओ एक मिनट के लिए रूक जाओ। पुलवामा पर हुए शहीदों के लिए, मौन श्रद्धांजलि अर्पित करो। स्वाभिमान की पिचकारी में, हृदय भाव का जल … Read more

बड़े दम का ‘पट्ठा’

सुनील चौरे ‘उपमन्यु’  खंडवा(मध्यप्रदेश) ************************************************ ‘पट्ठा’ याने प्रत्येक काम में दक्ष, जी हाँ,जो हास-परिहास,चतुराई से अपना काम निकलवा ले या फिर अपना काम करवा ले,मेरे ख्याल से उसी का नाम पट्ठा होता है। मुझे याद है,बामन्दा जी दामनदा जी की तारीफ़ कर रहे थे। कह रहे थे-“सभी दूर प्रसिद्ध हो चुका है मेरा पट्ठा।” यानि … Read more