महासंत रविदास मानवता के सार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* महासंत रविदास जी, मानवता के सार।फैलाकर के जो गए, एक नया उजियार॥ महासंत रविदास जी, थे समता के रूप।अपने युग को दे गए, जो सूरज की धूप॥ हरिपूजा की श्रेष्ठता, धारण करके खूब।रीति-नीति की दे गए, हमको पावन दूब॥ महासंत रविदास जी, गाकर के मृदुगीत।बने मनुज की चेतना, के सच्चे मनमीत॥ … Read more

पथ पर चल रहे हम…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ पथ पर चल रहे हम,सफ़र है जो खत्म नहीं होताहर एक रास्ता निकल ही जाता हैकहीं ना कहीं,इसलिए पथ पर चल रहे हैं हम। रुकना नहीं है, हमें चलते जाना है,तभी तो मंज़िल मिलेगीरास्ता यूँ ही कट जाएगा,पथ पर चल रहे हैं हम। राह में मुश्किल बड़ी होती हैढूंढते रहते … Read more

हिन्द की नारी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ हम हैं हिन्द की नारी,बस देश के लिए ही कुछ काम करना हैइसमें ना कोई भी अंदेशा है,हैं हम हिन्द की नारी। तुम क्यों अब गुफ्तगू में बैठे हो ?क्यों तुम कायरता में समय खोए होकरना है अब मुझे देश की सेवा,क्यूँ तुम फालतू-सी बातों में! क्यूँ उसमें तुम अब देर करते … Read more

किया युवाओं में अद्भुत संचार

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** होशंगाबाद में जन्म लिए माखन लाल चतुर्वेदी,माता सुंदरी बाई और पिता थे नंदलाल चतुर्वेदी। चार अप्रैल अठारह सौ नवासी मध्य प्रदेश जन्म,विधा थी काव्य, निबंध, नाटक और संस्मरण। पत्नी ग्यारसी बाई, उपनाम ‘एक भारतीय आत्मा’,संपादन और पत्रिका ‘कर्मवीर प्रताप’ औेर ‘प्रभा’। आधुनिक काल ओजपूर्ण, भावात्मक स्वतंत्रता सेनानी,कविता ‘दीप से दीप जले, एक … Read more

जीते जी मृत होना

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जीते जी मृत होना यही, जब कर्म शून्य हो प्राण है,आलस्य की तिमिर छाया में, गलती जीवनी पहचान है।भौतिक मृगतृष्णा माया में, उलझे है पल-पल हर श्वांस-चलती-फिरती बनी लाश वे, भूले आस्था मनुज गान है॥ अकर्मण्यता ही अपमान है, मानवता का क्षय मसान है,कर्तव्यों से विमुख हुआ जो, उसका … Read more

बासंती दौर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सखी! आज तो भौंरे, कलियों को चूमे,है पराग की चाह, वनों-उपवन में घूमे।मन में लिए उमंग, बसंती हवा चल रही-जिसने पाया मीत, वहीं मस्ती में झूमे॥ आया है ऋतुराज, गीत मौसम के गाता,सरसों का उल्लास, आज जन-जन को भाता।वन-उपवन हैं दिव्य, कछारों में है यौवन-मिलन-नेह का भाव, गीत अभिसारी गाता॥ कामदेव … Read more

उत्सव मनाएं, शान सजाएं

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** उत्सव मनाएं, उत्सव मनाएं,आज राष्ट्र की शान सजाएंजन गण मन अधिनायक गाएं,आज राष्ट्र की शान सजाएं। सब मिल देश धवजा फहराएं,ध्वजा फहराएं, मंगल गाएंदेकर बधाई उत्सव मनाएं,गणतंत्र दिवस, शान सजाएं। जाति-पाति का भेद मिटाएं,ऊँच-नीच को जड़ से मिटाएंबंधुत्व सहयोग, आओ बढ़ाएं,देश की रक्षा, लहू में समाए। निर्वाचन का महत्व समझें,निर्वाचन … Read more

छायावाद के प्रखर स्तम्भ ‘जयशंकर’

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मन में दीप जलाए शंकर तम से प्रतिदिन लड़ते जाते,आशा नवसुर शब्द सजाकर, शंकर राहें गढ़ते जाते।मौन की कोख में पलती है अनकही अन्तर्मन अनुभूति-सपनों को सच करने तत्पर, पौरुष पग-पग बढ़ते जाते॥ शब्दों की शुचि गंगाजल में हिय भाव कमल खिलते जाएँ,संवेदित अंतस से गीतों मधुरिम छन्दों ढलते … Read more

‘विफलता’ तुम मत आना

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ विफलता तुम मत आना मेरी गली,हम सफलता की सहेली हैंहमने हर विफलता को भगाया है,दर्द के पन्नों को फाड़ा है। गुलाब-सी खिली सफलता की,पंखुरियों को जीवन ने सजाया हैवर्णन करती हूँ सबसे मैं सफलता का,विफलता तू ना आना मेरी गली। चरित्र मेरा सफल है,क्यों मैं विफलता से डरूँ ?खिले फूल हैं जीवन … Read more

अकेला चलता पथिक

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* कांधे पर संघर्षों का भार,आँखों में सपने हज़ारमंज़िल की राह पर चला अकेला,पथिक न माने कभी भी हार। नहीं राह आसान लक्ष्य की,पर मन में अटूट विश्वास हैमिल ही जाएगी मंज़िल उसको,साहस और धीरज जिसके पास है। थकने पर भी जो रुके नहीं,वही लक्ष्य तक जाता हैअकेले चलना जो सीख गया,वह भीड़ … Read more