गाँव की नारी
बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** माटी की गंध,ओस पर भी चलेंउगे सूरज। घूँघट नीचे,सपने हैं गहरेमुस्कान खिली। हाथ मेंहदी,संग हल की धुनधरा मुस्काए। नदी किनारे,घड़ा भी मुस्कुराएसाँझ उतरी। धूप तपती,मन में ठंडी छाँवगाँव की नारी। माटी की गोद,सपनों को सींचतीगाँव की नारी। तन हलका,आँखों में है उत्साहसाहसी मन। रास्ते पर है,पायल की झंकारगीत जोशीले। ओस-से पाँव,भोर की … Read more