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प्रखर राष्ट्रभक्त डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
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राष्ट्रवाद के प्रखर शिल्पी, 
हिंदुत्व की सनातन लिपि
विश्वविद्यालय के कुलपति, 
जनसंघ पार्टी के सेनापति।

माँ जोगमाया देवी, पिता आशुतोष, 
श्यामा को मुस्लिम लीग से असंतोष
विरोध में हिंदू महासभा का जयघोष, 
बंगाल वित्तमंत्री बन सरकार से रोष।

डॉ. मुखर्जी का त्याग, तपस्या एवं समर्पण, 
एक राष्ट्र, निशान, विधान को जीवन अर्पण
महिला शिक्षा, संस्कृति, हिंदुत्व चिंतन थे दर्पण, 
शिक्षाविद्, देशभक्त डॉ. श्यामा का करें तर्पण।

कश्मीर से काटो धारा-३७० आपके ‘सत्य दर्पण’,
एक राष्ट्र, एक निशान, एक विधान  सत्ता को दर्पण
आपकी प्रेरणा से मिला कश्मीर को ‘उपहार अर्पण’,
आपके चिंतन में देश, समाज को ‘समाज दर्पण’।

आपकी प्रेरणा व दर्शन में झलकता ‘आदर्श दर्पण’,
शिक्षाविद् हो आपने समर्पित किया ‘ज्ञान दर्पण’
कश्मीर की खातिर याद रखेगा देश ‘बलि अर्पण’,
आपके आदर्शों पर खड़ा देश करे ‘श्रद्धांजलि अर्पण’।

भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री को नमन, 
सिंदरी फर्टिलाइजर से जगमग हुआ देश का चमन
चितरंजन लोकोमोटिव कारखाना से बढ़ी रोजी-अमन, 
हिंदुस्तान फर्टिलाइजर बना देश की खेती का यतन।

विलक्षण प्रतिभा डॉ. श्यामा ३३ आयु में युवा कुलपति, 
कलकत्ता विश्वविद्यालय में पिता भी रहे पूर्व कुलपति
विश्वविद्यालय से अंग्रेजी प्रतीक हटे लिखे श्री/श्रीमती, 
डॉ. मुखर्जी की विद्वता के कायल थे डॉ. राजेंद्र राष्ट्रपति।

डॉ. श्यामा के शिष्य थे अटल बिहारी वाजपेयी,
कश्मीर अटल, आडवाणी, डॉ. जोशी की अंगड़ाई।
३७० धारा, हिंदू पलायन व अत्याचार पर हुई लड़ाई, 
भाजपा अब जन्म स्थान पश्चिम बंगाल में विजय पायी॥

परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत, कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”