मेरे मित्र ‘सुधीर’ बड़े धीर
आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )****************************************************** बड़े धीर, सुशील, मित्र मेरे सुधीर,सत्य, निष्ठा, कर्मठता जैसे नीरअद्भुत थे, बजरंग दल के वीर,स्वयं सेवक ऐसे न होते अधीरसंकल्प ऐसे हनुमान-महावीर। विशुद्ध चिंतन, विचारों के अग्नि वीर,चेहरे पर हँसी, गुस्से पर काबू स्थिरसमाजिक चेतना, सेवाभावी तस्वीर,मित्रता मिलती ऐसी जिनकी तकदीरयोग साधना में सदैव जीवित रहें सुधीर। परोपकार पर … Read more