वृक्षों की पुकार
बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** वृक्ष तुम्हें कह रहे मानव,क्यों कर रहा अत्याचार ?ले हाथ कुल्हाडी मुझे,क्यों काटे बारम्बार ? कट जाऊंगा में अगर,तुम छाया कहाँ से लाओगे ?बिन छाया तुम सभी,लू के थपेड़े खाओगे। निज स्वार्थ को पूरा करने,कल कारखाने लगाते होरेल पटरियाँ बिछाकर तुम,मेरा घर क्यूँ जलाते हो ? कहाँ गये मेरे जंगली जानवर,कहाँ गयी … Read more