मौन ही रहने दो
डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ एक दिन मुझे,मौन ही रहने दोआज न कुछ सुनने को है,औरन कुछ सुनाने को…एक दिन जी लो तुम भी,अपने वास्तेऔरमैं, अपने वास्ते…पर, मौन रहकर भी क्या ?मौन रह पाई…हृदय में उफनती लहरेंक्या ? शांत हो पाई…न खुद को समझ पाईऔरन ही समझा पाई…वही गूँजती रही,रोज-रोज की किच-किचऔरढेर सारे अनुत्तरित, सवालों … Read more