विश्व व्यवस्था में एक निर्णायक आवाज ‘२१वीं सदी का भारत’

पूनम चतुर्वेदीलखनऊ (उत्तरप्रदेश)********************************************** भारत का लोकतंत्र विश्व में सबसे बड़ा और जीवंत माना जाता है। यहाँ की चुनाव प्रणाली को संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पारदर्शिता की कसौटी पर खरा उतरना होता है, परंतु कुछ ऐसे क्षण आते हैं, जब लोकतंत्र को उसकी परिभाषा और नैतिकता पर कसौटी से गुजरना पड़ता है। … Read more

टूटते-बिखरते परिवार की गंभीर चिंता आवश्यक

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ गुरुग्राम में पिता द्वारा टेनिस खिलाड़ी बेटी राधिका की गोली मार कर हत्या ने पूरे देश में सनसनी फैला कर रख दी है। कहा जा रहा है कि पिता और बेटी के बीच कोई विवाद था। इसी तरह जयपुर में एक कलियुगी पिता सालों से अपनी ही २ नाबालिग बेटियों का शारीरिक … Read more

निरंकुश अभिव्यक्ति से जुड़े सर्वोच्च फैसलों का स्वागत हो

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** सर्वोच्च न्यायालय ने अभिव्यक्ति की आजादी एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समाज विरोधी अभिव्यक्ति की सुनवाई करते हुए समय-समय पर जो कहा, वह जहां संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिहाज से खासा अहम है, वहीं संतुलित- आदर्श राष्ट्र एवं समाज व्यवस्था का आधार भी है। सोशल मीडिया मंचों पर समाज विरोधी अभिव्यक्ति … Read more

रिश्तों को लीलता खोखला ‘स्वाभिमान’

ऋचा गिरिदिल्ली*************************** कहाँ खो गया रिश्तों से प्रेम…? एक पिता ने अपने ही ‘स्वाभिमान’ की हत्या कर दी, अपने स्वाभिमान के लिए फिर और स्वाभिमानी बन गया हमेशा के लिए!पिता का धर्म होता है अपने बच्चों के ख्वाबों को हकीकत बनाने में उसके पीछे चट्टान की मानिंद मजबूती से खड़े होने का, अपने बच्चों के … Read more

कहर बरसाते-बरपाते पहाड़

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** मेरा गाँव ऐसे इलाके में है, जहां हर साल पहाड़ों के दरकने (भूस्खलन) का भयावह रूप देखने को मिल रहा है। बादल फटने से भयंकर त्रासदी से दो-चार होना पड़ रहा है। आषाढ़-सावन भादो में कभी भी यह मंजर हतप्रभ कर रहा है। आए-दिन पहाड़ों में घरों के समूल दफन … Read more

न्यू मीडिया में हिंदी सामग्री में उल्लेखनीय प्रगति

डॉ.शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** नवीन संचार तकनीकों की क्रांति ने जिस प्रकार से वैश्विक स्तर पर संवाद और अभिव्यक्ति के स्वरूप को परिवर्तित किया है, उसी परिवर्तन ने भारत जैसे बहुभाषिक देश की प्रमुख भाषा ‘हिंदी’ को भी एक नई पहचान और नई शक्ति दी है। पहले जहाँ हिंदी को पारंपरिक मीडिया-जैसे रेडियो, दूरदर्शन और प्रिंट … Read more

पांडेय जी के हसीन सपने और बदलती दुनिया

लालित्य ललितदिल्ली*********************************** पांडेय जी अचानक से बौद्धिक हुए, जब उनके मन में विचार आया कि हाथी के दांत खाने के और दिखावे के और हुआ करते हैं; उन्होंने यह भी मान लिया कि दुनिया आपसे कहीं ज्यादा और मोल-भाव किए रखती है कि किससे क्या मिल जाए और कहाँ तक मिलने की संभावना है। वे … Read more

आतंकवाद में डिजिटल तकनीकों का बढ़ता उपयोग चिन्ताजनक

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** आतंकी वित्तीय मदद पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की नई रिपोर्ट में आतंकवादी गतिविधियों में डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा के समक्ष एक नई और गहन चुनौती की ओर संकेत करते हुए आतंकवादी गतिविधियों में डिजिटल तकनीकों … Read more

परिवार का अपना हो

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ८० वर्षीय गायत्री जी विशाल जर्जर कोठी के एक हिस्से में अपने पुराने नौकर दीनू काका और उनकी बेटी सुमित्रा के साथ रहती हैं। लगभग १ महीने पहले उनके शरीर का आधा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया है। उसके बाद से वह अपना काम भी नहीं कर पातीं… पैसा तो बैंक में उनके … Read more

जरूरी है रिश्तों के बाग को सींचना

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** कहाँ खो गया रिश्तों से प्रेम…? भारत और भारतीय रिश्तों के ताने-बाने में जन्म के साथ जुड़ जाते है और मृत्यु और मृत्यु के बाद तक भी आपसी रिश्तों में याद किए जाते हैं। परिवार भारतीय समाज की सबसे छोटी इकाई और इससे हमारी प्रथम पहचान समाज में बनती … Read more