बिना पंख परिंदे…
एम.एल. नत्थानीरायपुर(छत्तीसगढ़)*************************************** खुली छोड़ दो जिंदगी,नीले खुले आसमान मेंअक्सर रखी हुई चीज़ें,नहीं मिलती सामान में। हर शख्स की मुश्किलें हैं,फिर भी रोज़ जिंदा हैहौंसलों की उड़ान से ही,बिना पंख का परिंदा है। कौन किसे क्या कहता है,लोग कितने खिलाफ हैंजितने भी मेरे साथ हैं,वो सब तो लाजवाब है। इंसान सभी है यहां पर,फ़र्क सिर्फ़ इतना … Read more