एक नई शक्ति

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… नारी संघर्ष से सदैवमुकाबला करती रहती,सुख-दु:ख की परिभाषा समझती हैवो समझती है भूख की शक्ति को,जिसे पाने के लिए अपने बच्चों को देती खुद भूखी रहकर निवालासमाज कहता- पुरुष प्रधान होता है,समाज की सफलता के पीछे तो नारी काकठिन संघर्ष छिपा होता है। जो हक की … Read more

पुस्तक प्रकाशन एवं सम्मान योजना के परिणाम जारी

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अमेरिका। वागीश अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने पुस्तक प्रकाशन एवं सम्मान योजना-२०२५ के परिणाम जारी कर दिए हैं। इसके अंतर्गत ५ रचनाकार चयनित किए गए हैं। संस्थापक अध्यक्ष डॉ. आरती ‘लोकेश’ ने बताया कि वागीश श्री शिवशंकर गुप्ता सम्मान (लघुकथा विधा की पुस्तक के लिए) में ‘करनी विष की लोय’ (लघुकथाकार- सविता मिश्रा ‘अक्षजा’) को और वागीशा … Read more

आहिस्ता-आहिस्ता

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* आहिस्ता-आहिस्ता ही प्रेम का दीपक जलता है,अपने ही संस्कार मन को पावन करता है। मन में प्रेम रहे तो सारी दुनिया प्रेममयी लगती है,हर दु:ख जीवन में नई-नई राहें बनाता है। नई उमंगों का आगमन ही जीवन है,आहिस्ता-आहिस्ता ही फूलों-सा खिलने लगता है। संघर्ष ही जीवन को आगे बढ़ना सिखाता है,आहिस्ता-आहिस्ता … Read more

महाभारत कालीन महिलाओं के शौर्य, द्वंद एवं प्रतिरोध पर हुई परिचर्चा

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भोपाल (मप्र)। अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच के स्थापना दिवस व ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ के विशिष्ट अवसर पर आभासी माध्यम से आयोजन किया गया, जिसमें मंच की प्रतिबद्ध महिला सदस्यों (सुश्री मधुलिका सक्सेना, सुश्री नीलिमा मिश्रा, सुश्री अनिता ‘रश्मि’ और डॉ.अंजू क्वात्रा) को ‘महिला रत्न सम्मान’ से विभूषित किया गया। साथ ही ‘महाभारत कालीन महिलाएँ : … Read more

‘स्त्री’ देती जीवन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘स्त्री’,धरा समानकरना नहीं तिरस्कार,देती जीवनवरदान। ‘नारी’,जन्म संतानपालन-पोषण करती,भू समानअभिभावक। ‘औरत’,जगत पहचानकरती जीवन संघर्ष,चुप रहतीपुष्प। ‘महिला’,कोमल मनवक़्त पर मैदान,भिड़ जातीरक्षा। ‘वनिता’,दुर्गा, कालीनहीं निर्बल-अबला,कभी ‘कामिनी’जानकी। ‘रमणी’,संस्कृति वाहककरती सदा भला,सृजन धुरीसंवेदनशील। ‘भार्या’,साथ चलतीप्रधानमंत्री, वैज्ञानिक, अभियंता,उड़ाती विमानसफलता। ‘जननी’,करती भागीदारीनिभाती हर परम्परा,रूप शक्तिपरिवार। ‘कांता’,सौन्दर्य-लक्ष्मीलुटाती ममता अपार,दर्द सहतीमुस्कान। ‘अर्धांगिनी’,कहलाती माँपर रहती पीड़ित,अनेक भेदभावविडम्बना। ‘मानवी’,सम्भालती घरहै रूप शक्ति,रखती … Read more

सम्मान कार्यक्रम २४ को, लेखक-कवि भी करें नामांकन

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मुजफ्फर नगर (बिहार)। मेरा वजूद फाउण्डेशन (मुजफ्फर नगर) की मासिक बैठक प्रत्यूष गोयल के प्रतिष्ठान मित्तल हाउस में अध्यक्ष पं. संजीव शंकर की अध्यक्षता में रखी गई। इसमें निर्णय लिया गया कि २४ मार्च को ‘’फिफ्टी प्लस द टैलेन्ट शो’ किया जाएगा। इसमें नामांकन के लिए साहित्यकार, कवि, छायाकार, नायक, सशक्त महिला, पत्रकार व अन्य … Read more

सदा खुशबू रचती नारी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… कई संघर्षों के बीच,कई कटाक्षों के पारकटी-कटाक्ष अपमान के बीच के बाद,संघर्षों से संघर्ष करगालियों-घरों के अंदर,सदैव खुशबू फैलाती है नारी। पसीने से लथपथ चेहरा,जख्मों से भरे हाथघिसे नाखूनों वाली नारी,फूल-से कोमल हाथ, जख्म सहते हाथदर्द सहते, चोट खाते हाथ,यही हाथ खुशबू रचते हैंसंघर्ष करते हैं ऐसे … Read more

मस्ती लेकर आई होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* होली मस्ती लेकर आई, खेल रहे कन्हाई,बरसाने से राधारानी, दौड़ी-दौड़ी आई।खेल रहे ग्वाले-ग्वालाएँ, मुखड़े हैं रंगीन-रंग-अबीरों की आभा तो, सारे ब्रज में छाई॥ खेल रहे देवर-भौजाई, उल्लासित है तन-मन,जीजू और सालियाँ खेलें, इतराता है आँगन।मची हुई हुड़दंग आज तो, हुरियारों का ज़ोर-लगता है पल में जी लेंगे, अब तो सारा जीवन॥ … Read more

नारी शक्ति का नया युग और चुनौतियाँ

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. मानव सभ्यता के विकास की कथा में यदि किसी शक्ति ने सबसे अधिक सृजन किया है, तो वह नारी शक्ति है। वह जीवन की जननी है, संस्कृति की वाहक है और समाज की संवेदनशील आत्मा है। भारतीय परम्परा ने नारी को केवल एक सामाजिक भूमिका तक सीमित … Read more

भरे रंग

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** भरे रंग पीली सरसों मेंयह बसंत है सरसाया,प्रकृति हुई है रंग-बिरंगीदेखो फिर फागुन आया। सजी हुई छवि जड़-चेतन कीमन-उमंग भर-भर जाए,पुष्पित कमल-कली उपवन मेंगुन-गुन भँवरे गीत सुनाएँ। पुलकित अंग-अंग धरती काऋतुपति सौरभ बिखराए,वृक्षों पर नव-कोपल आएपादप रसाल बौराए। फसल हुई स्वर्णिम कंचन-सीफागुन ख़ुशियाँ ले आया,चंचल मतवाली बयार मेंनृत्य मयूर ने दिखलाया। झाँझ … Read more