भारत मैत्री भाव बढ़ा रहा

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ विश्व में चल रही उथल-पुथल,सब अपने-आपकोश्रेष्ठ बताने में लगे हैं,पर भारत आज भी मैत्री भाव बढ़ा रहा है। हमने हाथ बढ़ाना सीखा है,दूसरों से उनका हक नहीं छीनना सीखाजो अभिमानी हैं, उन्हें पता नहीं,यह भारत आज भी मैत्री भाव बढ़ा रहा है। शक्तिशाली बने राष्ट्रों में,आपसी कुंठा व ईर्ष्या भाव … Read more

गिरकर उठना ही ‘सफलता’

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** सफलता ऐसा कोई ताज़ नहीं,जो सिर पर रख दिया जाता हैयह तो वह यात्रा है,जिसे पग-पग पर गढ़ना पड़ता है। सफलता पसीने की बू में बसती है,रातों की नींद वह चुरा लेती हैअसफलताओं की राख से,वह नए स्वप्न सुलगा लेती है। हर ठोकर कभी प्रश्न नहीं बनती,कई बार वह उत्तर होती हैक्योंकि … Read more

धीरज… छोर ना छूटे

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** बस धीरज का छोर न छूटे,लक्ष्य हासिल करें मगर हौसला न टूटेकठिन से कठिन डगर हो,साँसों का बंधन ना टूटे। जग में कई तरह के लोग बसे,अच्छो का साथ कभी ना छूटेबुराई घोलती जीवन में जहर,रिश्तों की नाव ही कुछ ऐसीजहां संबधों का साथ न छूटे। देख लो खुली आँखों से,बस … Read more

चाय गुणकारी, औषधिय पर्याय

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** चाय का अद्भुत है पूर्व इतिहास,चीन से शुरू ४००० वर्ष है खासभारत में अंग्रेजों का चाय इतिहास,बहुत नया २०० साल है परिहास। चाय की गुणवत्ता में भारत है विख्यात,चाय में दूध की मिलावट में भारत प्रख्यातवैसे ! अंग्रेजों ने भारत में लाल चाय की शुरुआत,बंगाली दादा ने बताई चाय … Read more

हिन्दी तुझको नमन

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ हिंदी तुझे मेरा वंदन,तन मन धन जीवन अर्पणहिंदी तुझे मैं हर पल लिखूँ,मेरे माथे की तू बिंदीमैं हिन्द की बेटी बस हिंदी जानूँक्या अब, क्या कल क्या ?वर्षों की बात लिखूँ,जन्म के जज्बात मैं लिखूँ। जीवन लिख दूं, जन्म-जन्म लिख दूं,हिंदी तुझे हर बार लिखूँमधुर मिलन के अनुराग लिखूँ,साजन के प्रेम की … Read more

सर्दियों की सुबह

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सुबह सर्दियों की,थोड़ी अलसाई-सीनरम धूप की चादर ओढ़े,ज्यों नींद में मुस्काई-सी। कोहरे के आगोश में शहर,छाई है धुंध-सीओस की बूँदें फूलों पर,चमकती हीरे-सी। रजाई से झांकती आँखें,सपनों में उलझी-सीसर्द हवा के झोंके,छेड़ें कहानी कुछ सिहरन-सी। चिड़ियों की हल्की चहचहाहट,देती सुबह की दस्तक-सीगलियों में कदमों की आहट जैसे,ठंड से करती समझौता-सी। छत पर … Read more

शिशिर के तेवर

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* ढाने लगा शिशिर, तेज अपने अब तेवर,जहाँ तहाँ सुलगने लगे अलाव के जेवरशीत ऋतु का जोर हुआ, बदले है आलम,सब लपेटना चाहते हैं रजाई गरमागरम। ताप रहे है सब निर्धन, अलाव के आसपास,घेर-घेर कर बैठे हैं, चेहरे पर लेकर अग्निउजासदीन-गरीब की झोपड़ियों में, कपड़े नहीं पर्याप्त,ठंड के इस कोहराम में, केवल … Read more

समाज सुधारक राजा राम मोहन राय

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** २२ मई १७१२ को जन्म राधानगर बंगाल,ब्राह्मण रूढ़िवादी परिवार में बीता बाल्यकालमाँ तारिणी देवी, पिता रमाकांत किए देखभाल,प्रारंभिक शिक्षा पटना में पाई, उच्च शिक्षा बंगाल। संस्कृत, फारसी, अरबी व अंग्रेजी भाषा अध्ययन किया अपार,भारतीय समाज की कुरीतियों पर बदले उनके विचारसती प्रथा, बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह का किया प्रतिकार,ब्रह्म … Read more

तन अर्पण दूँ आज

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारत-माता चरण-कमल में, तन अर्पण दूँ आज,कण-कण शोणित राष्ट्र-सुरक्षा में, प्रण अर्पण दूँ आजतेरी गोदी जन्म दिया है, ऋण उतारूँ बार-बार,दुर्लभ यह मानव जीवन सारा, तुझ पर वारूँ आज। सब कुछ पाया तेरे आँचल में, फिर भी तृष्णा जागी,मृगनयनी के मोह-जाल में, चेतनता ही भागीलोभ-तिमिर में खोया मानव-मूल्य अनमोल … Read more

माँ के जज़्बात

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ माँ के हाथों की लकीरें, घिस गईं थीं,बर्तन मांजते…पाँव की बिछिया दब गई थी,रस्में निभाते…घूंघट के नीचे ले लेती थी सिसकियाँ तब,जब, याद आ जाते थे पीहर के नजारेब्रम्ह बेला में ही पीस-कूट लेती थी,गुनगुनाते अनाज के दाने,भर लाती थी गाँव के बीच में बने,पक्के कुएं से ताजा पानी। अपने … Read more