गंगा अवतरण कथा

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** गंगा दशहरा पर्व (२६ मई) विशेष… क्यों होता है गंगा दशहरा तुमको आज बताती हूँ,बड़ी पुरानी कथा प्रेम से तुमको आज सुनाती हूँ। राजा सगर ने एक बार था अश्वमेध का यज्ञ किया,चुरा अश्व को इंद्र ने कपिल मुनि के आश्रम बांध दिया। सगर ने अपने साठ हजार पुत्रों … Read more

मेरा भाई

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** ‘विश्व भाई दिवस’ विशेष…. एक समय के बाद,धीरे-धीरे बदलने लगते हैं भाई भीवे उतना नहीं बोलते,जितना बचपन में बोलते थे। उनकी हँसी,घर के आँगन से निकलकरज़िम्मेदारियों की भीड़ में खो जाती है,जो लड़का कभीबारिश में भीगते हुए,कागज़ की नाव बहाया करता थावही एक दिनराशन की थैली उठाए,थके कदमों से घर लौटता है। … Read more

हजारों दुआ माँग लेते हैं

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* कभी-कभी तुमसे,गुफ्तगू कर लेते हैंतेरे हाँ-हूँ से ही,जी भर लेते हैं। तेरी बेवजह हँसी से,दिल को गुलज़ार कर लेते हैंदेख लेते हैं कभी तुझे आड़ से,तू मेरी ओर मुड़े तो ऐतबार कर लेते हैं। सपनों में प्रेम गीत गुनगुनाकर,मीठी नींद के आग़ोश में सो जाते हैंइस प्रीत के बदले,हम तेरा क्या … Read more

भाई मेरी परछाई

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* ‘विश्व भाई दिवस’ विशेष… २४ मई का पावन दिवस,खुशियाँ लाया अनंत असीमयह ‘विश्व बन्धु दिवस’ रखता है,प्रेम भाव फैलाने की चाहत असीम। ‘भाई’ वह, जो कंधे से कंधा,मिलाकर चले पिता काराखी की भी लाज रखे,अपनी दुलारी बहनों की। माता को सुख पहुँचाते,करे देश की रक्षासीमा पर सजग प्रहरी,बन कर करें देश … Read more

संकट में दीवार ‘भाई’

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)***************************************** ‘विश्व भाई दिवस’ विशेष… सिर्फ रिश्तों का नाम नहीं है ‘भाई’,घर की धड़कन का दूसरा धाम है ‘भाई’जब भी गिरता हूँ, हाथ बढ़ाता है ‘भाई’,खुद भूखा रहकर भी मुझे खिलाता है ‘भाई।’ मेरी हर जीत में सबसे ज़्यादा हँसता है ‘भाई’,दर्द छुपाकर भी मेरे संग चलता है ‘भाई’माँ की ममता, पिता … Read more

सूरज ने उगली आग

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* सूरज ने उगली आग,धूप लहराई चारों ओर, अग्नि-सी बरसाईना दिन में चैन मिला, ना रातों में राहत,हर समय लू के थपेड़े तन-मन को झुलसातेमन को अशांत किए रहते। झुलस रहे हैं हर पेड़ के पत्ते,कोई ठंडी छाँव भी अब राहत न दे सकेहर जीव-जंतु और पक्षी गर्मी से परेशान है,पानी ढूँढते … Read more

मैं अंत में…

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** एक समय के बादधीरे-धीरे कम होने लगती हैमनुष्य के भीतर की आवाज़, वह बोलता तो हैपर उसके शब्दों में,पहले जैसी गर्माहट नहीं बचती।  जैसे किसी पुराने चूल्हे में,राख तो होपर आग न बची हो कहीं, लोग समझते हैंचुप रहना स्वभाव है उसका।  कोई नहीं देख पाता,कि वह भीतर ही भीतरकितनी आवाज़ों के ढहने से … Read more

कुल्हड़ वाली चाय निराली

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कुल्हड़ वाली चाय निराली,सोंधी-सोंधी ख़ुशबू वालीपी कर ताज़ा सब हो जाते,एक गर्म चाय की प्याली। सर्दी को यह दूर भगाती,फुर्ती बदन में सबके लातीचाय सभी के मन को भाती,आपस में मित्रता बढ़ती। कई तरह से लोग बना लें!,कई मिनट तक इसे उबालेंकोई गर्म पानी में डाले,पाउच को ही कोई हिला ले। अदरक … Read more

आँखों में धूल झोंक जगत

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आँखों में धूल झोंक जगत को, कितने लोग इतराते हैं, मीठी बोली की चाशनी लेकर, भीतर विष बरसाते हैंसत्य खड़ा चौराहे पर चुपचाप है तमाशा देख रहा, ऊँची दुकानें फीके पकवान, फिर  भी मेले लगाते हैं। नाक कटाकर भी कुछ जन तो, बस अपनी धाक जमाते हैं, घर का भेदी बनकर अपने, दीवारों  को ढहवाते हैंस्वार्थ नदी बनकर बहता है मानस के सूखे आँगन में, थाली में छेद वही करते जो रोटी रोज़ ही खाते हैं। दाल न गलती जब मेहनत … Read more

बुढ़ापा-सबसे बड़ा सत्य

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* बुढ़ापा आते ही सूरत-सीरत बदल जाती है,नाम वही रहता है, पर जीवन की रीत बदल जाती है। पहले हर काम फुर्ती से हो जाया करता था,अब वही काम करते-करते दिन ढल जाता है। हाथ जल्दी से उठते नहीं,पैर लड़खड़ाकर राह पर चल पड़ते हैं। घुटनों का दर्द दिन-ब-दिन बढ़ता जाता है,कमर … Read more