मिला ही नहीं
सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)****************************************** उम्र-भर जो मुझे मिला ही नहीं।वो बिछड़ कर जुदा हुआ ही नहीं। वक़्त हर ज़ख़्म की दवा है मगर,ज़ख़्मे-दिल अब तलक भरा ही नहीं। जो लिखा था ख़मोशियों ने मेरी,तुमने उसको कभी पढ़ा ही नहीं। ज़िंदगी की किताब से हमको,ग़म मिटाना था पर मिटा ही नहीं। साँस ले जिसमें … Read more