महा दुर्ग चित्तौड़
बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** मापनी आधारित एकलिंग छंद (दण्डक) विधान, रचनाशिल्प-४६ मात्रा, प्रति चरण ४ चरण, २-२ समतुकांत हो, १२, २४, ३५, ४६ वीं मात्रा पर यति अनिवार्य है। चरणांत गुरु (२) अनिवार्य है। गुहिल वंश मेवाड़ी, लड़ते युद्ध अगाड़ी,एक लिंग दरबान, मानते माँ धरती। सिसोदिया कहलाए, जन मेवाड़ी भाए,महा दुर्ग चित्तौड़, देख आँखें भरती। योद्धा थे … Read more