हिंदी विरोध के पीछे है अंग्रेजी का वर्चस्व

रविदत्त गौड़ ******************************** हमारे देश में एक राजनीतिक संघर्ष बरसों से चल रहा है हिंदी और अंग्रेजी के बीच। दुर्भाग्यवश इस संघर्ष का नेतृत्व जो लोग कर रहे हैं, वे हिंदी का विरोध तो देश की अन्य भाषाओं के नाम पर कर रहे हैं, पर उस विरोध के कारण अंग्रेजी और अधिक सुदृढ़ होती जा … Read more

घूँघट के पट खोल…

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** मैं कुछ अति मित्रता प्रेमी किस्म का बंदा हूँ, जल्दी से फेसबुक पर अपने ५ हजार का लक्ष्य पार करना चाहता हूँ, ताकि मेरा पृष्ठ भी ‘पब्लिक फिगर’ बन जाए। सच पूछो तो कुछ हस्ती जैसी ‘फीलिंग’ आती है, शायद मेरी ये भावना फेसबुक के खोजी कुत्ते ने सूंघ ली … Read more

रहें ना रहें हम, महका करेंगें…

डॉ. मीना श्रीवास्तवठाणे (महाराष्ट्र)******************************************* लता मंगेशकर विशेष (२८ सितम्बर १९२९-६ फरवरी २०२२)… ‘एको अहं, द्वितीयो नास्ति,न भूतो न भविष्यति!’(अर्थात-एक मैं ही हूँ, दूसरा सब मिथ्या है, ना मेरे जैसा कोई आया था और ना ही मेरे जैसा कोई आएगा। ना ही भूतकाल में ऐसा कुछ हुआ था, और ना ही भविष्य में ऐसा कुछ होगा।)यह … Read more

घुटती साँसों से आयु की चिन्ता

ललित गर्ग दिल्ली************************************** वायु प्रदूषण का संकट भारत की राष्ट्रव्यापी समस्या है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की हाल ही में जारी रिपोर्ट इस चिन्ता को बढ़ाती है, जिसमें कहा गया कि वायु प्रदूषण के चलते भारत में जीवन प्रत्याशा में गिरावट आ रही है। इसमें फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले पी.एम. २.५ कण की बड़ी भूमिका … Read more

आस्था में मिलावट…

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** बहुत दिनों बाद सब्जी मंडी जाना हुआ…। श्रीमती जी मुझे पकड़ कर आज ले ही गईं, लेकिन मुझे इस बार भी मंडी के एक कोने में खड़ा कर दिया गया। मंडी में ख़रीददारी श्रीमती जी अकेले ही करती हैं। पता नहीं कैसे, जैसे ही मैं खरीददारी करने जाता हूँ, मंडी … Read more

हिंदी भाषा का विकास व संरक्षण सभी की जिम्मेदारी

मंजरी वी. महाजनहमीरपुर (हिमाचल प्रदेश)*************************************** भक्ति, संस्कृति, और समृद्धि की प्रतीक ‘हिन्दी’ (हिन्दी दिवस विशेष)… महात्मा गांधी जी के अनुसार- ‘हिंदी का प्रश्न मेरे लिए देश की आजादी का प्रश्न है। हिंदी भाषा केवल एक राजभाषा नहीं है, यह संपूर्ण देश की संस्कृति के रूप में पल्ल्वित और पुष्पित भाषा है।’           जब भारत वर्ष आजादी … Read more

कहना तो पड़ेगा

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** भारतीय भाषाओं में अंतर्संवाद समय की मांग… साहित्य जनमानस के धरातल पर जनभाषा में उपजता और पुष्पित-पल्लवित होता है। सरकार सभी स्तरों पर औपनिवेशिक दासता और उसके सभी प्रतीकों से छुटकारा पाने की बात कर रही है, लेकिन फिर भी भारतीय भाषाओं के साहित्य के पुरोधा और भारत की साहित्य अकादमी … Read more

भारतीय भाषाओं में अंतर्संवाद समय की मांग

-डॉ. विमलेश कान्ति वर्मा सीधी बात… साहित्य अकादमी की स्थापना के ७० वर्ष पूरे होने पर छः दिवसीय साहित्योत्सव २०२४ बड़ी धूमधाम से सम्पन्न हुआ। निमंत्रण पत्र पर अंकित था ‘विश्व का सबसे बड़ा साहित्य का उत्सव’। आयोजन भव्य और गरिमापूर्ण था। देश के कोने-कोने से आए मित्रों से मिलने का अच्छा अवसर था, पर … Read more

प्रसादम से खिलवाड़ आस्था पर आघात

ललित गर्ग दिल्ली************************************** तिरुपति मंदिर विवाद… लाखों-करोड़ों हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र तिरुमाला भगवान वेंकटेश्वरस्वामी मंदिर में मिलने वाले लड्डू (प्रसाद) में घी की जगह जानवरों की चर्बी और मछली के तेल के इस्तेमाल की शर्मनाक एवं लज्जाजनक घटना ने न केवल चौंकाया है, बल्कि मन्दिर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यह मामला … Read more

समृद्धि की प्रतीक ‘धरोहर’ हिन्दी

प्रो. लक्ष्मी यादवमुम्बई (महाराष्ट्र)**************************************** भक्ति, संस्कृति एवं समृद्धि की प्रतीक हिंदी (हिन्दी दिवस विशेष)… हिन्दी आज दुनिया की एक महत्वपूर्ण भाषा बन गयी है। आज १२७ देशों के विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जाती है। दुनिया के लगभग सभी देशों में हमारे दूतावास हैं। अन्य देशों के भी दूतावास हमारे देश में हैं। इनमें से कई … Read more