एकांत में ही भक्ति
प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** हिलाने-डुलाने से दही नहीं जमता,एकांत में ही मन प्रभु भक्ति रमता। ज्ञान, भक्ति, कर्म प्रभु-कृपा से मिल जाते जब,मिट जाती सारी जीवन में अहमता। रूप, धन का दबदबा प्रभु-भक्ति मिटा देता है,भोगचक्र फंस तू हर योनि में जनमता। खिल्ली उड़ा-उड़ा के खुश हों जो ग्रंथ, संत,आ जाती उनके जीवन … Read more