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वसीयत:पत्र बेटी के नाम

कविता जयेश पनोत
ठाणे(महाराष्ट्र)
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मेरी प्यारी बेटी,
इस छोटे से पत्र में आज अपनी जिन्दगी भर की धरोहर लिख रही हूँ। इसमें वो कानूनी कागजों का तमाम खुलासा नहीं,लेकिन मेरे जीवन के चलचित्रों का वर्णन है।
जो सिर्फ और सिर्फ मेरी धरोहर है,जिसे मैंने अपने कलेजे में पाला है,अपनी पलकों तले आँखों का काजल बना सजा के रखा,अपनी साँसों के तार से सदा जोड़े रखा…आजीवन। इसके पहले तू कुछ समझे,मैं तुझे इसका मूल्य बता देना चाहती हूँ।
तो सुन,विरासत (धरोहर) एक ऐसा शब्द है-जिसका सीधा सम्बन्ध पैतृक सम्पत्ति व अधिकारों से है। चाहे वो हमारा मूलभूत स्वभाव हो,या संस्कार।
बेटी,ये ही हमारी असली विरासत हैं,वक्त के साथ साथ आलीशान महल भी खंडहर बन जाते हैं,ये तो निर्जीव हैं। सजीवों की भी यही कहानी है,एक दिन इस काया को भी खाक में मिल जाना है। इसीलिए,अपनी जिन्दगी के कुछ लम्हों को,डायरी में तजुर्बों की तरह समेट कर रखा है तुम्हारे लिए।
जब कभी मेरे न होने पर तुम अपने-आपको अकेला पाओ,या जिन्दगी के किसी मोड़ पर जब निराशा का आभास हो,तो तुम मेरी इस डायरी में मुझे जिन्दा महसूस करोगी। और मैं हमेशा,हर वक्त में तुम्हारे साथ होऊँगी।
मेरे पास तुम्हें वसीयत में देने के लिए सिर्फ, मेरी कमाई ये कुछ डायरी हैं। इसमें मैंने जीवन के हर दौर में भी अपने-आपको हौंसले से जोड़े रखा है।
आज ये वसीयत,धरोहर,तजुर्बे,कुछ संस्कार,औऱ ढेर सारा प्यार,ममता इसमें कैद कर रही हूँ।
मेरे न होने पर इसे मेरी तरह मान देना,ये मेरी तरफ से तुम्हारे लिए एक धरोहर है…यही मेरी वसीयत है। ढेर सारा आशीर्वाद।

तुम्हारी मम्मी
कविता

परिचयकविता जयेश पनोत का बसेरा महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई स्थित खारकर अली रोड पर है। १ फरवरी १९८४ को क्षिप्रा (देवास-मप्र)में जन्मीं कविता का स्थाई निवास मुम्बई ही है। आपको हिन्दी,इंग्लिश, गुजराती सहित मालवी भाषा का ज्ञान भी है। जिला-ठाणे वासी कविता पनोत ने बीएससी (नर्सिंग-इंदौर,म.प्र.)की शिक्षा हासिल की है। आपका कार्य क्षेत्र-नर्स एवं नर्सिंग प्राध्यापक का रहा,जबकि वर्तमान में गृहिणी हैं। लेखन विधा-कविता एवं किसी भी विषय पर आलेखन है। १९९७ से लेखन में रत कविता पनोत की रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। फिलहाल स्वयं की किताब पर काम जारी है। श्रीमती पनोत के लेखन का उद्देश्य-इस रास्ते अपने-आपसे जुड़े रहना व हिन्दी साहित्य की सेवा करना है। इनकी दृष्टि में पसंदीदा हिन्दी लेखक,कोई एक नहीं, सब अपनी अलग विशेषता रखते हैं। लेखन से जन जागरूकता की पक्षधर कविता पनोत के देश और हिन्दी भाषा के प्रति विचार-
‘मैं भारत देश की बेटी हूँ,
हिन्दी मेरी राष्ट्र भाषा
हिन्दी मेरी मातृ भाषा,
हिन्द प्रचारक बन चलो,
कुछ सहयोग हम भी बाँटें।