डॉ. कुमारी कुन्दन
पटना(बिहार)
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व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)…
मई-जून का गर्म महीना,
गर्म हवा भी खूब सताती
उफ्, ओह सब हुए विकल,
तन को चाहे झुलसाती।
नींबू पानी और गन्ने का ज्यूस,
छाछ, शिकंजी सबको भाती
सबके अपने-अपने गुण हैं,
पर संतुष्टि चाय से आती।
हाड़ कंपाती ठंढक हो, फिर,
जैसे बिस्तर पर आँख खुली
बड़ी मन को राहत दे जाती है,
चाय हो अदरक-लौंग घुली।
मस्त महीना सावन का हो,
काली बदली घिर-घिर आती
मिले गर्म समोसे संग पकौड़ी,
चाय की लज्जत बढ़ जाती।
बदन दर्द हो या सर भारी,
दुविधा कोई मन को घेरे
मन में कोई बात चुभी हो,
मन को हो एकाकीपन घेरे।
गर्म चाय की एक प्याली,
आलस-सुस्ती दूर भगाती।
चाय का जादू चल जाता है,
चेहरे पर रौनक छा जाती ।
साथ सफ़र हो अपनों का,
या जमघट फिर यारों का
अपनों बीच ये रंग जमाती,
पार्टी की रौनक बढ़ जाती।
सुबह-शाम हो कोई पहर,
वक़्त-वक़्त पर याद सताती।
दवा लेना हम भूल भी जाते,
चाय की चुस्की भुलाई ना जाती॥